Barabanki News: बाराबंकी के हैदरगढ़ और सुबेहा में राजश्री गोल्ड, विमल और कमला पसंद पान मसाला की एमआरपी से अधिक कीमत पर थोक बिक्री का आरोप। बाट-माप विभाग ने जांच और कार्रवाई की बात कही।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 04 नवंबर 2026
बाराबंकी के हैदरगढ़ और सुबेहा क्षेत्र में पान मसाला के थोक कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ थोक विक्रेता कंपनियों की ओर से पैकेट पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को दरकिनार कर फुटकर दुकानदारों से निर्धारित कीमत से कहीं ज्यादा रकम वसूल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन उत्पादों पर एमआरपी साफ-साफ लिखी है, उन्हीं की थोक बिक्री में कथित तौर पर मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
इस कथित वसूली का असर केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका आर्थिक बोझ अंततः आम ग्राहकों पर भी पड़ रहा है। फुटकर दुकानदारों का कहना है कि जब उन्हें थोक में ही महंगे दाम पर पान मसाला खरीदना पड़ रहा है तो वे भी अधिक दाम पर बिक्री करने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पैकेट पर अंकित एमआरपी से अधिक कीमत पर थोक बिक्री कैसे हो रही है और जिम्मेदार विभाग की निगरानी कहां है?
₹108.50 एमआरपी वाला राजश्री गोल्ड ₹122 में
नाम न छापने की शर्त पर एक फुटकर दुकानदार ने बताया कि राजश्री गोल्ड पान मसाला के 31 यूनिट वाले पाउच पर 108 रुपये 50 पैसे एमआरपी अंकित है, लेकिन थोक विक्रेता इसे 122 रुपये में बेच रहे हैं।
स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक, इस तरह एक पाउच पर अंकित एमआरपी से 13 रुपये 50 पैसे अधिक वसूले जा रहे हैं।
विमल और कमला पसंद पर भी ज्यादा कीमत वसूलने की शिकायत
फुटकर दुकानदारों ने अन्य ब्रांडों को लेकर भी इसी तरह की शिकायत की है। उसके मुताबिक, विमल और कमला पसंद पान मसाला के पाउच पर अंकित एमआरपी से अधिक कीमत ली जा रही है।
दुकानदार द्वारा बताए गए दामों का विवरण इस प्रकार है:
फुटकर दुकानदार का आरोप है कि 35 यूनिट वाले कमला पसंद के एक पैकेट पर ही 40 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। हालांकि, अधिक कीमतों पर बिक्री संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा जांच होना बाकी है।
थोक में महंगा सामान मिलने से फुटकर दुकानदार भी परेशान
फुटकर दुकानदारों का कहना है कि थोक स्तर पर अधिक कीमत चुकाने के कारण उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है। उनका दावा है कि यदि उन्हें सामान निर्धारित कीमत और उचित व्यापारिक शर्तों पर नहीं मिलेगा तो बिक्री के दौरान लागत और मुनाफे का संतुलन बनाए रखना मुश्किल होगा।
दुकानदारों के मुताबिक, इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ता है। उन्हें 4 रुपए की जगह पांच रुपये प्रति यूनिट की दर से सामान बेचना पड़ता है, जिससे आम ग्राहक की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
दुकानदारों ने सवाल उठाया है कि जब किसी उत्पाद के पैकेट पर एमआरपी अंकित है तो थोक विक्रेता उससे अधिक कीमत किस आधार पर वसूल रहे हैं? क्या इस संबंध में कोई अलग व्यापारिक व्यवस्था है या फिर यह नियमों की अनदेखी का मामला है?

बाट-माप निरीक्षक पवन तिवारी बोले- शिकायत मिली तो होगी जांच और कार्रवाई
मामले में बाट-माप विभाग के निरीक्षक पवन तिवारी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस तरह की किसी शिकायत या मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई भी दुकानदार एमआरपी से अधिक कीमत पर सामान नहीं बेच सकता। यदि ऐसा हो रहा है तो यह गलत है।
निरीक्षक ने मामले की जांच कराने और नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की बात कही है। अब देखना होगा कि विभाग हैदरगढ़ और सुबेहा के थोक बाजारों में जांच कर इन आरोपों की वास्तविकता सामने लाता है या नहीं।
क्या जांच के बाद सामने आएगी थोक बाजार की सच्चाई?
हैदरगढ़ और सुबेहा क्षेत्र में सामने आई यह शिकायत उपभोक्ताओं के अधिकारों और बाजार की पारदर्शिता से जुड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि पैकेट पर अंकित एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक्री की जा रही है तो संबंधित विभाग को बिल, खरीद मूल्य, पैकेजिंग और बिक्री की शर्तों की जांच करनी चाहिए।
अब निगाहें बाट-माप विभाग पर हैं कि वह केवल शिकायत का इंतजार करेगा या खुद पहल कर थोक विक्रेताओं के यहां जांच करेगा। साथ ही, संबंधित थोक विक्रेताओं और कंपनियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












