Barabanki: शहर की पुरानी गल्ला मंडी में खाद्य सुरक्षा विभाग की सैंपलिंग कार्रवाई विवादों में।
व्यापारी नेता ने वसूली सिंडिकेट का आरोप लगाया, विरोध में दुकानें बंद, जांच की मांग।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 26 मार्च 2026
बाराबंकी शहर की पुरानी गल्ला मंडी में खाद्य सुरक्षा विभाग की सैंपलिंग कार्रवाई उस समय विवादों में घिर गई, जब स्थानीय व्यापारी नेता बब्बी गुप्ता ने विभाग पर कथित “वसूली सिंडिकेट” चलाने का गंभीर आरोप लगाया।
उनके बयान के बाद व्यापारियों का आक्रोश फूट पड़ा और मंडी क्षेत्र में दुकानें बंद हो गईं। कई घंटों तक हंगामे जैसी स्थिति बनी रही।

“सैंपलिंग के नाम पर वसूली”—व्यापारी नेता के आरोप
तय पैटर्न पर चलने का दावा
व्यापारी नेता बब्बी गुप्ता ने आरोप लगाया कि खाद्य सुरक्षा विभाग की सैंपलिंग कार्रवाई एक तय पैटर्न पर संचालित होती है।
उनके अनुसार, पहले दुकान से नमूना लिया जाता है, फिर नोटिस भेजा जाता है, उसके बाद व्यापारी को विभागीय कार्यालय बुलाया जाता है और अंत में “समझौते” के नाम पर रकम तय की जाती है।
उन्होंने दावा किया कि जो व्यापारी रकम दे देता है, उसका मामला शांत कर दिया जाता है, जबकि विरोध करने वालों को बार-बार नोटिस, लैब शुल्क और भारी जुर्माने के दबाव में डाला जाता है।

रिश्वत के पुराने आरोपों का भी जिक्र
वीडियो सामने आने का दावा
बब्बी गुप्ता ने यह भी कहा कि इससे पहले भी खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों के कथित रूप से रिश्वत मांगने और लेने के वीडियो सामने आ चुके हैं।
उनका दावा है कि इन मामलों में 15 से 30 हजार रुपये तक की मांग के आरोप लगे थे, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि त्योहारों से पहले सैंपलिंग अभियान का अचानक तेज होना इन आरोपों को और मजबूत करता है।

छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई, बड़े कारोबारियों पर ढील?
असली स्रोत पर कार्रवाई न होने का आरोप
मंडी के व्यापारियों ने आरोप लगाया कि विभाग की कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित है, जबकि मिलावट की असली जड़ मानी जाने वाली बड़ी फैक्ट्रियों और पैकेजिंग यूनिटों पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई जाती।
नकली नमक, मिलावटी दूध, तेल और अन्य खाद्य उत्पादों के मामलों के बावजूद स्रोत स्तर पर कार्रवाई न होना भी सवालों के घेरे में है।

व्यापारियों का विरोध तेज, एडीएम को सौंपा ज्ञापन
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
मामले को लेकर आक्रोशित व्यापारियों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध जताते हुए एडीएम को ज्ञापन सौंपा है।
व्यापारियों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

खाद्य विभाग ने आरोपों को बताया निराधार
“सैंपलिंग नियमित प्रक्रिया का हिस्सा”
वहीं, खाद्य सुरक्षा विभाग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सैंपलिंग अभियान एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है।
विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई आम जनता को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की जाती है।

बढ़ते विवाद के बीच उठे पारदर्शिता के सवाल
इस पूरे विवाद के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या व्यापारियों की मांग के अनुसार निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नहीं।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान
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