बाराबंकी के हैदरगढ़ CHC में मुफ्त पैथोलॉजी सुविधा होने के बावजूद मरीजों से ₹1500 वसूले जाने का मामला सामने आया है।
महिला मरीज को बाहर से जांच और दवा लेने के लिए मजबूर किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 27 अप्रैल 2026
जनपद बाराबंकी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) हैदरगढ़ में एक गंभीर लापरवाही और कथित अनियमितता का मामला सामने आया है। यहां आधुनिक पैथोलॉजी सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को बाहर से महंगी जांच कराने और दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को भी उजागर कर दिया है।
मरीज का आरोप – अस्पताल में जांच होते हुए भी निजी लैब भेजा
कोतवाली हैदरगढ़ क्षेत्र के गंगापुर संसारा गांव निवासी संग्राम रावत अपनी 27 वर्षीय पत्नी गुड़िया के साथ इलाज के लिए CHC पहुंचे थे। महिला को दाहिने स्तन में गांठ की शिकायत थी।
ओपीडी में तैनात चिकित्सक डॉ. फरहत अली ने मरीज की जांच के बाद CBC, LFT और KFT टेस्ट लिखे।
मरीज के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पैथोलॉजी सुविधा होने के बावजूद उन्हें अस्पताल परिसर में संचालित एक निजी पैथोलॉजी में भेजा गया, जहां तीनों जांचों के नाम पर ₹1500 वसूले गए।

रिपोर्ट सामान्य, फिर भी बाहर की महंगी दवाएं
जांच रिपोर्ट सामान्य आने के बावजूद डॉक्टर ने मरीज को बाहर की दवाएं लिख दीं और 15 दिन बाद दोबारा दिखाने की सलाह दी।
पीड़िता के अनुसार, मेडिकल स्टोर पर 10 दिन की दवा की कीमत ₹1050 बताई गई, जिससे आर्थिक तंगी के चलते वह सिर्फ 3 दिन की दवा ₹480 में ही खरीद सकी।
यह स्थिति बताती है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के बावजूद मरीजों को निजी खर्च उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

डॉक्टर का पक्ष – ‘CHC में संभव नहीं थी जांच’
मामले पर जब संबंधित चिकित्सक डॉ. फरहत अली से बात की गई तो उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर की आशंका के चलते जांच कराई गई थी, हालांकि रिपोर्ट सामान्य आई।
उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित जांच CHC में संभव नहीं थी, इसलिए मरीज को बाहर भेजा गया।
स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल, जांच की मांग
इस पूरे मामले ने स्थानीय स्तर पर चर्चा को तेज कर दिया है। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में सुविधा उपलब्ध है, तो मरीजों को निजी लैब भेजना और महंगी दवाएं लिखना गंभीर लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
चिकित्सा प्रभारी डॉ. जयशंकर पांडेय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

क्या कहते हैं नियम?
सरकारी अस्पतालों में अधिकांश जांच और दवाएं निशुल्क या न्यूनतम दर पर उपलब्ध कराने के निर्देश हैं। ऐसे में मरीजों को बाहर भेजना और अतिरिक्त खर्च कराना नियमों के विपरीत माना जाता है।
अहम सवाल
- क्या CHC में सुविधाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
- क्या मरीजों को जानबूझकर निजी पैथोलॉजी की ओर भेजा जा रहा है?
- जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद













