Barabanki: बंकी रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है।
24 मार्च से धरना प्रदर्शन का ऐलान, कई संगठनों ने दिया समर्थन।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 23 मार्च 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी शहर से सटे कस्बा बंकी की रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण की वर्षों पुरानी मांग अब आंदोलन का रूप ले चुकी है। भारतीय किसान मजदूर यूनियन दशहरी संगठन के बैनर तले 24 मार्च से धरना प्रदर्शन का ऐलान किया गया है।
इसको लेकर संगठन के प्रदेश सचिव व जिलाध्यक्ष निहाल अहमद सिद्दीकी के निवास कार्यालय पर एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई किसान, मजदूर और सामाजिक संगठनों ने भाग लेकर आंदोलन को समर्थन दिया।

रोजाना जाम और बढ़ते हादसों से परेशान जनता
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में निहाल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि बंकी रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि भारी वाहनों की आवाजाही, रोजाना लगने वाला जाम और बढ़ते सड़क हादसे आम जनता के लिए गंभीर समस्या बन चुके हैं। स्कूली बच्चे, मरीज और स्थानीय लोग रोजाना इस समस्या से जूझ रहे हैं।

प्रशासन को चेतावनी—नहीं मिला आश्वासन तो अनिश्चितकालीन धरना
संगठन ने साफ किया कि 24 मार्च से शुरू होने वाला धरना जनहित का आंदोलन है। यदि प्रशासन द्वारा ओवरब्रिज निर्माण के लिए लिखित समयसीमा और बजट का आश्वासन नहीं दिया गया, तो यह धरना अनिश्चितकालीन किया जाएगा।
नेताओं ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर आमरण अनशन जैसे कड़े कदम भी उठाए जाएंगे।

कई संगठनों ने दिया समर्थन
इस बैठक में कई प्रमुख संगठनों और नेताओं ने भाग लेकर आंदोलन को समर्थन दिया। इनमें बहुजन आर्मी, भारतीय जनजाति महासभा, विभिन्न किसान यूनियन और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी शामिल रहे।
सभी संगठनों ने एक स्वर में कहा कि यदि 24 मार्च तक प्रशासन ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

लंबे समय से ओवरब्रिज की मांग, समाधान का इंतजार
स्थानीय लोगों का कहना है कि बंकी रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज न होने से आए दिन जाम लगता है और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
लंबे समय से इस समस्या के समाधान की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। ऐसे में 24 मार्च को प्रस्तावित धरना प्रदर्शन को लेकर पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












