बाराबंकी के देवा रोड रेलवे ओवरब्रिज पर ट्रक की चपेट में आने से 32 वर्षीय शुभम सिंह वर्मा की मौत हो गई। हादसे के बाद चालक फरार है और नो-एंट्री व्यवस्था पर सवाल उठे।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 28 सितंबर 2026
बाराबंकी शहर में भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए लागू नो-एंट्री व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। देवा रोड रेलवे ओवरब्रिज पर तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से करीब 32 वर्षीय युवक की मौत हो गई। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी।
मृतक की पहचान शुभम सिंह वर्मा उर्फ ‘इशू’, निवासी लखपेड़ाबाग, बाराबंकी के रूप में हुई है। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और स्थानीय लोगों में आक्रोश देखने को मिला।
देवा रोड रेलवे ओवरब्रिज पर ट्रक की चपेट में आया युवक
जानकारी के मुताबिक, शहर के लखपेड़ाबाग निवासी, सतीश वर्मा सूतमिल तिराहे के पास सीमेंट व मौरंग, बालू की दुकान चलाते है। सोमवार की शाम उनका छोटा बेटा शुभम सिंह वर्मा उर्फ ‘इशू’ (32 वर्ष) बाइक से दुकान की तरफ जा रहा था।
जब वह देवा रोड रेलवे ओवरब्रिज पर पहुंचा उसी समय FCI से सरकारी गेहूं लादकर आ रहे तेज रफ्तार ट्रक नंबर UP 33 AT 9484 ने युवक की बाइक में टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही शुभम सड़क पर जा गिरा और ट्रक के पहिए के नीचे सिर आ जाने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्था को संभाला।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं फरार ट्रक चालक की तलाश की जा रही है।

नो-एंट्री व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने शहर में भारी वाहनों के प्रवेश को लेकर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि बाराबंकी शहर में एफसीआई और रेलवे माल गोदाम की ओर आने-जाने वाले भारी वाहनों के कारण अक्सर यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, भारी वाहनों के प्रवेश के लिए नो-एंट्री व्यवस्था निर्धारित है, लेकिन इसके प्रभावी पालन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि व्यस्त समय में भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक है तो ऐसे वाहन शहर के प्रमुख मार्गों और ओवरब्रिज तक कैसे पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि नो-एंट्री केवल कागजों पर लागू रहने के बजाय सड़क पर भी प्रभावी तरीके से दिखाई देनी चाहिए।

जुलाई में भी माल गोदाम के पास हुई थी दर्दनाक घटना
भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता का एक कारण हाल में हुआ एक और दर्दनाक हादसा भी है।
7 जुलाई 2026 को माल गोदाम के पास ट्रक की चपेट में आने से 14 वर्षीय हर्षवर्धन तिवारी की मौत हो गई थी। हर्षवर्धन बंकी नई बस्ती स्थित ओम नगर निवासी चंद्रिका प्रसाद तिवारी का इकलौता पुत्र था।
बताया गया था कि हर्षवर्धन साइकिल से किंग जॉर्ज स्कूल जा रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद भी शहर में भारी वाहनों की आवाजाही और यातायात व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे।

लगातार हादसों के बाद व्यवस्था पर निगाह
अब देवा रोड रेलवे ओवरब्रिज पर शुभम सिंह वर्मा की मौत के बाद एक बार फिर शहर में भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर बहस तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एफसीआई और रेलवे माल गोदाम की ओर जाने वाले भारी वाहनों के लिए निर्धारित मार्ग और समय का सख्ती से पालन कराया जाना जरूरी है। उनका कहना है कि इससे शहर के व्यस्त मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने और दुर्घटनाओं की आशंका घटाने में मदद मिल सकती है।
हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम
घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन चौकी प्रभारी अनुराग पाठक, यातायात प्रभारी राम यतन यादव और ट्रैफिक इंस्पेक्टर मनोज कुमार राय पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
मौके पर सिपाही सौरभ, चौधरी, उद्यम सिंह समेत अन्य पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे। पुलिस ने यातायात व्यवस्था को संभालने के साथ हादसे की जांच शुरू की।
शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। वहीं फरार ट्रक चालक की तलाश में पुलिस जुटी है।
बड़ा सवाल: नो-एंट्री का पालन कब होगा प्रभावी?
देवा रोड ओवरब्रिज पर हुए हादसे के बाद एक बार फिर शहर की नो-एंट्री व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना जरूरी है।
शुभम सिंह वर्मा की मौत के बाद अब सवाल यह है कि शहर में भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने वाली नो-एंट्री व्यवस्था आखिर कब पूरी तरह प्रभावी तरीके से लागू होगी, ताकि व्यस्त सड़कों पर ऐसे हादसों का खतरा कम किया जा सके।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












