Barabanki News: बाराबंकी के बदोसराय में युवक ने पुलिस पर चोरी कबूल कराने के लिए मारपीट और ‘फर्जी मुकदमे व हाफ एनकाउंटर’ की धमकी देने का आरोप लगाया। एसपी को शिकायत, मेडिकल और CCTV जांच की मांग।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 14 सितंबर 2026
बाराबंकी में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बदोसराय थाना पुलिस पर एक युवक को घर से उठाकर थाने में बंद करने, चोरी कबूल कराने के लिए बेरहमी से मारपीट करने और शिकायत करने पर फर्जी मुकदमे में फंसाने तथा ‘हाफ एनकाउंटर’ की धमकी देने का आरोप लगा है।
मामले में कस्बा व थाना बदोसराय निवासी हर्षित मिश्रा उर्फ शानू पुत्र गोपाल मिश्रा ने पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय को शिकायती पत्र देकर पूरे घटनाक्रम की शिकायत की है। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि 11 सितंबर को हल्का दरोगा लक्ष्मीकान्त तिवारी एक सिपाही के साथ उसके घर पहुंचे और उसे थाने लेकर गए। आरोप है कि वहां उसे पीछे के रास्ते से ले जाकर एक कमरे में बंद कर दिया गया और बाद में चोरी के मामले में कबूलनामा कराने के लिए उसके साथ मारपीट की गई।
शिकायत में पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि मारपीट के दौरान उसे पट्टे, डंडे और लात-घूंसों से पीटा गया तथा मां-बहन की गालियां दी गईं। इतना ही नहीं, घटना की शिकायत करने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
घर से बुलाकर थाने ले जाने और कमरे में बंद करने का आरोप
शिकायतकर्ता हर्षित मिश्रा के मुताबिक, 11 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 11 बजे बदोसराय थाने के हल्का दरोगा लक्ष्मीकान्त तिवारी एक सिपाही के साथ उसके घर पहुंचे।
पीड़ित का आरोप है कि पुलिसकर्मी उसे थाने बुलाकर ले गए और वहां मुख्य रास्ते से न ले जाकर पीछे के रास्ते से एक कमरे में ले जाकर बंद कर दिया।
कुछ देर बाद पुलिसकर्मी कस्बे के ही शिव प्रकाश पुत्र मुनुवा को लेकर वहां पहुंचे। शिकायत के अनुसार, इसके बाद पुलिसकर्मियों ने शिव प्रकाश और हर्षित के साथ मारपीट की।
चोरी कबूल कराने के लिए मारपीट का आरोप
हर्षित ने एसपी को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि दरोगा लक्ष्मीकान्त तिवारी, सिपाही आशीष सिंह और एक अन्य अज्ञात सिपाही ने पहले शिव प्रकाश को लात-घूंसों से पीटा।
इसके बाद शिकायतकर्ता के साथ भी पट्टे, डंडे और लात-घूंसों से मारपीट किए जाने का आरोप है। पीड़ित के मुताबिक, मारपीट के दौरान पुलिसकर्मियों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और जान से मारने की धमकी भी दी।
हर्षित का आरोप है कि जब उसने मारपीट का कारण पूछा तो पुलिसकर्मियों ने उससे कहा कि उसे अपने चाचा मुंजुल मिश्रा के घर हुई चोरी कबूल करनी होगी। शिकायत के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर कहा कि जब तक चोरी स्वीकार नहीं करेगा, तब तक उसे वहीं बंद रखा जाएगा।
पिता ने एसपी के CUG नंबर पर की कॉल
पीड़ित के अनुसार, जब उसके पिता गोपाल मिश्रा को बेटे को थाने ले जाए जाने और उसके साथ मारपीट की जानकारी हुई तो वह थाने पहुंचे।
शिकायत के मुताबिक, गोपाल मिश्रा ने थाने में बेटे के साथ कथित मारपीट का विरोध किया और दोपहर 12:39 बजे पुलिस अधीक्षक बाराबंकी के CUG नंबर पर फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी।
पीड़ित का दावा है कि फोन पर बातचीत के बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से थाना प्रभारी को फोन किया गया। इसके बाद हर्षित को करीब दोपहर 3 बजे थाने से छोड़ा गया।
थाने के CCTV फुटेज में आने-जाने की पूरी घटना होने का दावा
शिकायतकर्ता ने अपने शिकायती पत्र में एक अहम दावा किया है। उसका कहना है कि उसे घर से थाने लाने और थाने से वापस जाने की CCTV फुटेज उपलब्ध है।
पीड़ित ने जांच के दौरान संबंधित CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने और इसकी जांच किए जाने की मांग की है।
फर्जी मुकदमे में बंद करवाने और हाफ एनकाउंटर की धमकी
शिकायत का सबसे गंभीर हिस्सा पुलिसकर्मियों द्वारा कथित धमकी से जुड़ा है।
पीड़ित का आरोप है कि उसे छोड़ने से पहले और बाद में पुलिसकर्मियों ने उसे गालियां देते हुए धमकाया कि यदि उसने घटना की जानकारी कहीं दी तो ‘बड़े साहब’ से कहकर फर्जी मुकदमे में बंद करवा देंगे या फिर उसका ‘हाफ एनकाउंटर’ कर देंगे।
12 सितंबर को जिला अस्पताल में कराया मेडिकल परीक्षण
हर्षित मिश्रा के अनुसार, घटना के अगले दिन 12 सितंबर 2026 को उसने जिला अस्पताल में अपना चिकित्सीय परीक्षण कराया।
इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को लिखित तहरीर देकर पूरे मामले की शिकायत की और आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की।
पीड़ित ने अपनी शिकायत में खुद को घटना के बाद से आहत और दहशत में बताया है।
प्रभारी निरीक्षक की भूमिका पर भी उठाए सवाल
शिकायतकर्ता ने मामले में प्रभारी निरीक्षक की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
पीड़ित का आरोप है कि थाने के भीतर उसके साथ कथित मारपीट की जानकारी प्रभारी निरीक्षक को थी, इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने इसे पुलिसकर्मियों के कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
अब जांच और कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल मामला पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में पहुंच चुका है। शिकायतकर्ता ने आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
मामले में CCTV फुटेज, जिला अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट, शिकायतकर्ता के पिता द्वारा की गई कॉल और अन्य उपलब्ध साक्ष्य जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस विभाग इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और क्या CCTV फुटेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












