Lucknow News: कैसरबाग जिला कोर्ट में वादकारी से मारपीट मामले में हाईकोर्ट सख्त।
चार वकीलों के कोर्ट परिसर में प्रवेश पर रोक, 10 साल के आयकर रिटर्न और संपत्ति का ब्योरा तलब।
IB जांच और BNS धारा 111 के तहत कार्रवाई पर भी विचार।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 29 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित कैसरबाग जिला न्यायालय परिसर में एक वादकारी और उसके साथ दिल्ली से आए अधिवक्ताओं के साथ कथित मारपीट के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बेहद सख्त और अभूतपूर्व रुख अपनाया है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया घटना को गंभीर मानते हुए चार अधिवक्ताओं के राजधानी के किसी भी न्यायालय परिसर में प्रवेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही उनकी आय, संपत्ति, व्यावसायिक गतिविधियों और पृष्ठभूमि की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका को किसी भी कीमत पर मुट्ठीभर लोगों का बंधक नहीं बनने दिया जा सकता। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकांश अधिवक्ता पूरी ईमानदारी और गरिमा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन उनके बीच मौजूद कुछ “काली भेड़ों” की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करना समय की मांग है।
चार वकीलों के कोर्ट परिसर में प्रवेश पर तत्काल रोक
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सेंट्रल बार एसोसिएशन के कनिष्ठ उपाध्यक्ष सौरभ कुमार वर्मा, हर्षित पांडेय, यश पांडेय और अभय प्रताप वर्मा के राजधानी लखनऊ के किसी भी न्यायालय परिसर में प्रवेश पर अगली सुनवाई तक प्रतिबंध लगा दिया।
इसके साथ ही अदालत ने चारों अधिवक्ताओं को निर्देश दिया कि वे—
- पिछले 10 वर्षों के आयकर रिटर्न,
- स्वयं एवं परिवार की चल-अचल संपत्तियों का विवरण,
- व्यवसाय से संबंधित जानकारी,
- पिछले 5 वर्षों में खरीदी और बेची गई संपत्तियों का पूरा ब्योरा
शपथपत्र के साथ न्यायालय में प्रस्तुत करें।
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को भी सौंपी गई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को भी जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी से घटना में शामिल अधिवक्ताओं की गतिविधियों, पृष्ठभूमि और अन्य पहलुओं की गोपनीय जांच कर सीलबंद रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने को कहा है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित करने, भूमि कब्जाने, वादकारियों या अधिवक्ताओं को धमकाने अथवा किसी संगठित आपराधिक गतिविधि के प्रमाण मिलते हैं तो पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 (संगठित अपराध) के तहत भी कार्रवाई करने पर विचार करे।
सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने जिला जज की रिपोर्ट और जिला न्यायालय परिसर के सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया पाया कि 21 जुलाई 2026 को अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा, हर्षित पांडेय, यश पांडेय और अभय प्रताप वर्मा वादकारी मोहम्मद शाकिर के साथ मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
हाईकोर्ट ने जिला जज और पुलिस को निर्देश दिया कि घटना में शामिल अन्य अधिवक्ताओं की भी पहचान कर उनका पूरा विवरण अगली सुनवाई से पहले न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
अदालत में सुनवाई के दौरान रो पड़ा पीड़ित
सुनवाई के दौरान पीड़ित वादकारी मोहम्मद शाकिर स्वयं अदालत में उपस्थित हुआ। जब उसने पूरी घटना का विवरण देना शुरू किया तो वह भावुक होकर रो पड़ा।
न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि पीड़ित स्पष्ट रूप से भयभीत और मानसिक रूप से आहत दिखाई दे रहा था। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए घटना में शामिल सभी अज्ञात महिला एवं पुरुष अधिवक्ताओं की पहचान कर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाए।
मुख्य आरोपी वकील पर पहले से आठ मुकदमे दर्ज
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि मुख्य आरोपी सौरभ कुमार वर्मा के विरुद्ध लखनऊ के विभिन्न थानों में आठ आपराधिक मुकदमे पहले से दर्ज हैं। सरकार ने यह भी कहा कि मुकदमों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।
इस पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इतने आपराधिक मुकदमों के बावजूद किसी व्यक्ति का बार एसोसिएशन का पदाधिकारी बने रहना अत्यंत गंभीर विषय है।
सेंट्रल बार के सचिव से जुड़ा विवाद भी आया सामने
सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में यह तथ्य भी लाया गया कि ऐशबाग स्थित एक विवादित संपत्ति पर कथित अवैध कब्जे के मामले में सेंट्रल बार एसोसिएशन के सचिव अवनीश दीक्षित के भाई भी आरोपी हैं।
इस पर न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियां न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
कई संस्थाओं को बनाया गया पक्षकार
हाईकोर्ट ने मामले की व्यापक जांच सुनिश्चित करने के लिए निम्न संस्थाओं को भी पक्षकार बनाया है—
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया
- उत्तर प्रदेश बार काउंसिल
- सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ
- भारत सरकार का गृह मंत्रालय
- भारत सरकार का विधि मंत्रालय
- पुलिस आयुक्त, लखनऊ
- उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP)
- आयकर विभाग
24 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 निर्धारित की है। तब तक चारों अधिवक्ताओं के कोर्ट परिसर में प्रवेश पर रोक जारी रहेगी और विभिन्न एजेंसियों को अपनी जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
न्यायालय ने अपने आदेश में साफ कहा कि न्याय वितरण प्रणाली को किसी भी व्यक्ति या समूह के प्रभाव में नहीं आने दिया जाएगा तथा कानून के शासन से समझौता नहीं किया जा सकता।
रिपोर्ट – नौमान माजिद











