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बाराबंकी में बिजली बचाने की नसीहत पर बवाल! नाजिर और तहसीलदार के पेशकार के बीच मारपीट, कर्मचारियों में मची हलचल

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बाराबंकी की रामनगर तहसील में बिजली बचाने को लेकर नाजिर और तहसीलदार के पेशकार के बीच विवाद मारपीट तक पहुंच गया।

अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों में समझौता कराया।

तैनाती और कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल उठे।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 09 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की रामनगर तहसील गुरुवार को उस समय चर्चा का केंद्र बन गई, जब तहसील के नाजिर अरविंद शुक्ला और तहसीलदार के पेशकार आशुतोष सिंह के बीच हुआ विवाद कथित तौर पर मारपीट तक पहुंच गया। आरोप है कि पेशकार आशुतोष सिंह ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर नाजिर की पिटाई कर दी। घटना के बाद तहसील परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारियों के बीच पूरे दिन इस विवाद की चर्चा होती रही।

बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारियों के बीच पिछले दो-तीन दिनों से कार्यालय में अनावश्यक बिजली खर्च रोकने को लेकर कहासुनी चल रही थी। गुरुवार को यही विवाद अचानक इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

बिजली बचाने की नसीहत बनी विवाद की वजह

तहसील कर्मचारियों के अनुसार, नाजिर अरविंद शुक्ला कार्यालय में अनावश्यक बिजली खर्च रोकने और सरकारी संसाधनों के उचित उपयोग की बात कर रहे थे। इसी मुद्दे को लेकर उनकी तहसीलदार के पेशकार आशुतोष सिंह से लगातार बहस हो रही थी।

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गुरुवार को दोनों के बीच फिर से कहासुनी हुई, जिसके बाद माहौल गर्मा गया और कथित तौर पर मारपीट की नौबत आ गई। घटना के बाद कुछ समय तक तहसील का कामकाज भी प्रभावित रहा।

पेशकार की तैनाती को लेकर भी उठे सवाल

घटना के बाद तहसील कर्मचारियों के बीच पेशकार आशुतोष सिंह की तैनाती को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं।

कर्मचारियों का कहना है कि आशुतोष सिंह के पिता स्वर्गीय अनिल सिंह अमीन पद पर कार्यरत थे और उनके निधन के बाद उन्हें अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। कर्मचारियों का दावा है कि नियमानुसार उनकी तैनाती वसूली अनुभाग में होनी चाहिए थी, लेकिन वे पिछले करीब छह वर्षों से तहसीलदार के पेशकार के रूप में कार्यरत हैं।

यह भी चर्चा है कि लगभग दो वर्ष पहले उनका स्थानांतरण हैदरगढ़ हो चुका था, लेकिन उन्होंने अब तक वहां कार्यभार ग्रहण नहीं किया। कर्मचारियों के बीच यह भी आरोप चर्चा का विषय बना रहा कि उनके स्थान पर एक निजी व्यक्ति से सरकारी कार्य कराया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अधिकारियों ने कराया समझौता, मामला कराया शांत

घटना की जानकारी मिलने के बाद तहसीलदार विपुल कुमार सिंह ने दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत कराई। काफी देर चली वार्ता के बाद दोनों पक्षों को समझाया गया और विवाद समाप्त कराया गया।

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तहसील परिसर में मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारियों का रुख पेशकार के पक्ष में दिखाई दिया, हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई।

पेशकार बोले- अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहे हैं नाजिर

तहसीलदार न्यायालय के पेशकार आशुतोष सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया।

उन्होंने कहा,

कोई प्रकरण नहीं है। नाजिर जी अनावश्यक विवाद फैला रहे हैं। उनकी क्या मानसिकता है, हम नहीं जानते। हमारी ओर से किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं किया गया है।”

तहसीलदार बोले- दोनों पक्षों ने गले मिलकर खत्म किया विवाद

इस पूरे मामले पर तहसीलदार विपुल कुमार सिंह ने बताया कि दोनों कर्मचारियों के बीच किसी बात को लेकर हल्का-फुल्का मनमुटाव हो गया था।

उन्होंने कहा,

“दोनों पक्षों को बैठाकर वार्ता कराई गई। दोनों ने स्वीकार किया कि ब्रह्मवश कहासुनी हो गई थी। इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मामला समाप्त कर दिया और पुनः अपने-अपने राजकीय कार्य में लग गए। अब किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है।”

सरकारी कार्यालयों के अनुशासन पर उठे सवाल

तहसील परिसर में हुई इस घटना ने सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और कार्य संस्कृति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का मानना है कि यदि समय रहते छोटे विवादों का समाधान नहीं किया जाए तो वे बड़े विवाद का रूप ले सकते हैं, जिससे सरकारी कार्य प्रभावित होने के साथ आम जनता को भी परेशानी उठानी पड़ती है।

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रिपोर्ट – निरंकार त्रिवेदी 

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