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बाराबंकी में सड़क हादसे में मौत के बाद बवाल: परिजनों और ग्रामीणों का शव के साथ प्रदर्शन, मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग; कई थानों की पुलिस ने संभाला मोर्चा

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बाराबंकी के घुंघटेर क्षेत्र में सड़क हादसे में युवक की मौत के बाद ग्रामीणों ने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।

मुआवजा, सरकारी नौकरी और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन हुआ।

कई थानों की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 09 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के घुंघटेर थाना क्षेत्र में बुधवार शाम हुए सड़क हादसे में घायल सिकटिया गांव निवासी राम सिंह (45) की इलाज के दौरान मौत के बाद गुरुवार को गांव में तनावपूर्ण माहौल बन गया। पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव पहुंचा तो परिजनों और ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया। मृतक के परिवार को सरकारी नौकरी, आर्थिक मुआवजा, कृषि भूमि का पट्टा, बच्चों की शिक्षा और वाहन चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई सहित कई मांगों को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया।

स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कई थानों की फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। घंटों चली वार्ता और समझाइश के बाद अधिकारियों के आश्वासन पर ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए।

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सीएचसी अधीक्षक के वाहन से टक्कर का आरोप, इलाज के दौरान हुई मौत

जानकारी के अनुसार, सिकटिया गांव निवासी राम सिंह बुधवार शाम अपनी स्विफ्ट कार (UP 32 RJ 1518) से ओदरिया प्लांट से घर लौट रहे थे। परिजनों का आरोप है कि पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे सीएचसी घुंघटेर के अधीक्षक डॉ. आर.पी. वर्मा के वाहन ने उनकी कार में जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में पलट गई। कार में फंसे राम सिंह को स्थानीय लोगों ने बाहर निकालकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

राम सिंह की मौत की खबर मिलते ही पत्नी मायादेवी, 14 वर्षीय बेटी आराध्या और 10 वर्षीय पुत्र अविनाश का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

शव का अंतिम संस्कार रोककर ग्रामीणों ने रखीं कई मांगें

गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचा तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने शव का अंतिम संस्कार रोक दिया और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया।

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ग्रामीणों और परिजनों ने प्रशासन के सामने निम्न प्रमुख मांगें रखीं—

  • मृतक की पत्नी मायादेवी को सरकारी नौकरी दी जाए।
  • कृषक दुर्घटना बीमा की राशि तत्काल दिलाई जाए।
  • पीड़ित परिवार को 5 बीघा कृषि भूमि का पट्टा आवंटित किया जाए।
  • परिवार को प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाए।
  • मृतक के दोनों बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार उठाए।
  • दुर्घटना करने वाले वाहन चालक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • मृतक की कार के बैंक लोन की शेष किस्तें सरकार द्वारा वहन की जाएं।

कई थानों की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही उप जिलाधिकारी फतेहपुर कार्तिकेय सिंह, क्षेत्राधिकारी फतेहपुर जगत राम कनौजिया, नायब तहसीलदार अनु सिंह, घुंघटेर थाना प्रभारी अभय कुमार, बड्डूपुर थाना प्रभारी मनोज कुमार सोनकर, कुर्सी थाना प्रभारी कृष्णकांत सिंह तथा माती थाना अध्यक्ष अजय कुमार त्रिपाठी भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे।

अधिकारियों ने ग्रामीणों और परिजनों से लंबी वार्ता की तथा शासन स्तर पर नियमानुसार सहायता दिलाने और मामले में विधिक कार्रवाई का भरोसा दिया। काफी देर तक चले गतिरोध के बाद ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए और उसके बाद राम सिंह का अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

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प्रशासन के आश्वासन के बाद शांत हुआ मामला

प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि पीड़ित परिवार को शासन की पात्र योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता दिलाने की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जाएगी। वहीं दुर्घटना की जांच और कानूनी कार्रवाई भी जारी रहेगी।

गांव में पूरे दिन पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

रिपोर्ट – ललित राजवंशी 

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