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बाराबंकी की इस नगर पंचायत में 9 साल बाद भी नहीं बुझी जनता की प्यास, 15 में से अधिकांश वार्डों में पेयजल संकट, दूषित पानी पीने को मजबूर लोग

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बाराबंकी की नगर पंचायत बेलहरा को अस्तित्व में आए 9 वर्ष पूरे होने वाले हैं, लेकिन अधिकांश वार्डों में अब तक नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।

लोग दूषित हैंडपंपों के पानी पर निर्भर हैं, जबकि लाखों रुपये से लगाए गए वॉटर कूलर भी खराब पड़े हैं।

गर्मी के बीच पेयजल संकट से नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 06 जून 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की नगर पंचायत बेलहरा को अस्तित्व में आए लगभग नौ वर्ष पूरे होने वाले हैं। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष का दूसरा कार्यकाल भी अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नगर पंचायत का दर्जा मिलने के समय स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि क्षेत्र में सड़क, नाली, स्वच्छ पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विकास होगा, लेकिन आज भी बेलहरा के अधिकांश वार्डों में लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।

गर्मी के इस मौसम में नगर पंचायत के 15 वार्डों में से अधिकांश क्षेत्रों में घर-घर शुद्ध पेयजल की नियमित आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। हालात यह हैं कि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी की तलाश में भटकना पड़ रहा है। कई परिवार आज भी हैंडपंपों और वैकल्पिक जल स्रोतों पर निर्भर हैं।

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केवल कुछ वार्डों तक सीमित है नल से जल योजना का लाभ

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पेयजल आपूर्ति के लिए बिछाई गई पाइपलाइन का लाभ अभी तक नगर पंचायत के केवल दो या तीन वार्डों तक ही सीमित है। इन वार्डों में कुछ घरों तक नलों से पानी पहुंच रहा है, जबकि शेष वार्डों के लोग इस सुविधा से वंचित हैं।

कई परिवारों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों को प्रतिदिन पानी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है, जिससे उनकी दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है।

दूषित और बदबूदार पानी बना चिंता का कारण

नगर पंचायत क्षेत्र में लगे अधिकांश सरकारी हैंडपंपों से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर भी लोगों में चिंता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अधिकतर हैंडपंपों का पानी दूषित और बदबूदार है, जिसे पीना स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

गर्मी के मौसम में स्वच्छ पेयजल की कमी के चलते लोगों को मजबूरी में इसी पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

लाखों की लागत से लगे वॉटर कूलर बने शोपीस

भीषण गर्मी से राहत दिलाने के उद्देश्य से नगर पंचायत द्वारा कुछ वर्ष पूर्व लाखों रुपये खर्च कर विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर वॉटर कूलर स्थापित कराए गए थे। लेकिन रखरखाव के अभाव में अधिकांश वॉटर कूलर अपनी उपयोगिता खो चुके हैं।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि कूलरों के कंप्रेशर खराब हो चुके हैं और उनमें से ठंडा पानी निकलना बंद हो गया है। कई स्थानों पर केवल सामान्य पानी ही उपलब्ध हो रहा है, जिससे राहगीरों और आम नागरिकों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है।

नौ साल बाद भी अधूरी मूलभूत सुविधाएं

जब बेलहरा को नगर पंचायत का दर्जा मिला था, तब लोगों को उम्मीद थी कि विकास कार्यों को गति मिलेगी और पेयजल जैसी बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान होगा। लेकिन नौ वर्षों के बाद भी सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता—स्वच्छ और नियमित पेयजल आपूर्ति—पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकी है।

इस स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि विकास के दावों के बावजूद यदि पीने का पानी ही उपलब्ध न हो सके तो नगर पंचायत बनने का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

क्या बोले अधिशासी अधिकारी?

नगर पंचायत बेलहरा के अधिशासी अधिकारी राजेश चौधरी ने बताया कि खराब पड़े छह वॉटर कूलरों की मरम्मत कराई जा चुकी है और उन्हें जल्द ही पुनः संचालित किया जाएगा।

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उन्होंने यह भी बताया कि नगर पंचायत के सभी 15 वार्डों में पेयजल लाइन बिछाने का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। विभाग का प्रयास है कि आने वाले समय में प्रत्येक घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाया जा सके।

बढ़ती गर्मी के बीच लोगों को समाधान का इंतजार

जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे बेलहरा के लोगों की परेशानियां भी बढ़ती जा रही हैं। नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन और नगर पंचायत जल्द ही अधूरी पेयजल परियोजनाओं को पूरा कर घर-घर पानी पहुंचाने का वादा पूरा करेगी।

फिलहाल स्थिति यह है कि हजारों लोग स्वच्छ पेयजल की सुविधा से वंचित हैं और गर्मी के इस मौसम में पानी की कमी तथा दूषित जल की समस्या से जूझने को मजबूर हैं।

रिपोर्ट – प्रिंस सोनी 

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