बाराबंकी के NLPD हॉस्पिटल में गलत इलाज का आरोप।
गलत खून चढ़ाने के बाद युवती की हालत बिगड़ी, मौत और जिंदगी के बीच जूझ रही नेहा।
बुखार और कमजोरी के इलाज के लिए अस्पताल आई थी नेहा।
खून चढ़ने के दो घंटे बाद पूरे शरीर में पड़ गए फफोले।
50 हजार खर्च होने के बाद भी बिगड़ती गई हालत।
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर अभद्रता और लापरवाही का लगाया आरोप।
डॉक्टर और हॉस्पिटल प्रबंधन के बयानों में विरोधाभास से उठे सवाल।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 30 मई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित आलापुर के नंदलाल प्रभु देवी (NLPD) हॉस्पिटल में कथित गलत इलाज और गलत खून चढ़ाए जाने से एक 22 वर्षीय युवती की हालत गंभीर होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही ने उनकी बेटी को मौत और जिंदगी के बीच झूलने पर मजबूर कर दिया है।
ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करने वाले पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। मां बेसुध होकर बेटी के सिरहाने बैठी है और बहन लगातार अस्पताल प्रशासन से जवाब मांग रही है। परिवार का आरोप है कि उनकी बेटी नेहा अपने पैरों पर चलकर अस्पताल आई थी, लेकिन अब हालत ऐसी हो गई है कि वह जिंदगी की जंग लड़ रही है।

बुखार और कमजोरी के बाद अस्पताल लेकर पहुंचे थे परिजन
सतरिख थाना क्षेत्र के भारागंज निवासी राजेश कुमार यादव ने बताया कि 22 मई 2026 को उनकी 22 वर्षीय बेटी नेहा को तेज बुखार और कमजोरी की शिकायत हुई थी। परिवार उसे इलाज के लिए नगर कोतवाली क्षेत्र के आलापुर-सफीपुर मार्ग स्थित नंदलाल प्रभु देवी (NLPD) हॉस्पिटल लेकर पहुंचा।
परिजनों के मुताबिक अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टर जगदीश राय ने प्लेटलेट्स और खून की कमी बताते हुए तत्काल ब्लड चढ़ाने की सलाह दी। आरोप है कि अस्पताल परिसर में संचालित ब्लड बैंक से ₹4500 लेकर एक यूनिट खून चढ़ाया गया।

खून चढ़ने के कुछ घंटों बाद बिगड़ गई हालत
परिजनों का आरोप है कि खून चढ़ने के करीब दो घंटे बाद ही नेहा के पूरे शरीर में फफोले पड़ने लगे। उसकी त्वचा जलने जैसी दिखाई देने लगी और हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
नेहा के पिता राजेश यादव ने रोते हुए बताया कि उनकी बेटी की हालत देखकर परिवार घबरा गया और उन्होंने तुरंत किसी बड़े अस्पताल रेफर करने की मांग की, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें भरोसा दिलाया कि मरीज को ठीक करके ही भेजा जाएगा।
परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों के भरोसे में आकर उन्होंने इलाज जारी रखा, लेकिन हालत सुधरने के बजाय और खराब होती चली गई।

इलाज में खर्च हुए हजारों रुपये, फिर भी नहीं मिला आराम
परिवार का आरोप है कि नेहा के इलाज में अब तक करीब 50 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। इसके बावजूद उसकी स्थिति लगातार गंभीर होती गई। हालत इतनी खराब हो गई कि उसके मुंह से खून और बलगम आने लगा।
आरोप है कि इसके बाद अस्पताल संचालक ने खुद हाथ खड़े कर दिए और परिवार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि मरीज को तुरंत लखनऊ के किसी बड़े अस्पताल — जैसे मेदांता या अपोलो — ले जाया जाए।

मेडिकल रिकॉर्ड मांगने पर अभद्रता का आरोप
परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने इलाज से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड मांगा तो अस्पताल प्रबंधन ने पहले काफी आनाकानी की और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।
नेहा की बहन शालिनी ने बताया कि काफी बहस और दबाव के बाद उन्हें मेडिकल रिकॉर्ड दिया गया। इसके बाद उन्होंने लखनऊ के कई बड़े डॉक्टरों से संपर्क किया, जहां कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि मरीज की हालत बेहद गंभीर है।
परिवार का आरोप है कि विशेषज्ञ इलाज समय पर नहीं मिलने और गलत खून चढ़ाए जाने के कारण नेहा की स्थिति नाजुक हुई।

अस्पताल में देर रात तक होता रहा हंगामा
शुक्रवार देर शाम मामला और गर्मा गया। परिजनों का आरोप है कि NLPD हॉस्पिटल के डॉक्टरों और एमडी ने उन पर मरीज को तत्काल अस्पताल से ले जाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
जब परिवार ने इसका विरोध किया और कहा कि उनकी बेटी अस्पताल अपने पैरों पर चलकर आई थी, लेकिन अब मौत से जूझ रही है, तो कथित तौर पर अस्पताल स्टाफ और प्रबंधन द्वारा अभद्रता शुरू कर दी गई।
हंगामे की सूचना पर यूपी-112 पुलिस और आवास विकास चौकी प्रभारी अभिषेक राय नगर कोतवाली पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन देर रात तक विवाद का समाधान नहीं निकल सका।

परिजनों की मांग — पहले मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराएं
परिवार का कहना है कि मरीज की हालत इतनी गंभीर है कि बिना व्यवस्था के किसी बड़े अस्पताल में ले जाना संभव नहीं है। परिजनों ने साफ कहा कि अगर अस्पताल प्रबंधन मेडिकल कॉलेज या किसी हायर सेंटर में भर्ती कराने की जिम्मेदारी ले, तभी वे मरीज को रेफर करेंगे।
नेहा की मां और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता राजेश यादव बार-बार यही कहते नजर आए कि उनकी बेटी अस्पताल खुद चलकर आई थी और अब जिंदगी की जंग लड़ रही है।

बहन ने इलाज करने वाले डॉक्टर पर उठाए सवाल
नेहा की बहन शालिनी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस डॉक्टर जगदीश राय द्वारा नेहा का इलाज किया जा रहा था, वह कथित तौर पर अस्थमा के डॉक्टर हैं और अस्पताल के स्थायी चिकित्सक भी नहीं हैं।
उसका आरोप है कि डॉक्टर सिर्फ ऑन कॉल मरीज देखने आते थे और उनके जाने के बाद मरीजों की देखभाल करने वाला कोई नहीं रहता था।
शालिनी ने कहा कि NLPD हॉस्पिटल में नेहा की बीमारी का विशेषज्ञ डॉक्टर तक मौजूद नहीं था, जिसके कारण इलाज सही तरीके से नहीं हो पाया।

डॉक्टर और एमडी के बयान में विरोधाभास
इस पूरे मामले में डॉक्टर जगदीश राय और NLPD हॉस्पिटल प्रबंधन के बयानों में भी विरोधाभास सामने आया है।
डॉक्टर जगदीश राय ने खुद को अस्पताल का स्थायी डॉक्टर बताया, जबकि हॉस्पिटल के एमडी ने कहा कि वह सिर्फ ऑन कॉल आते हैं।
इसके अलावा मरीज को रेफर करने के सवाल पर भी दोनों के बयान अलग-अलग रहे। डॉक्टर जगदीश का कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि मरीज की हालत में सुधार हो जाएगा, इसलिए रेफर नहीं किया गया। वहीं हॉस्पिटल प्रबंधन का दावा है कि तीन दिन पहले से परिजनों को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी जा रही थी।
दोनों के बयानों में अंतर आने के बाद परिजनों के आरोपों को और बल मिल रहा है।

कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

पहले भी विवादों में रहा है हॉस्पिटल
स्थानीय लोगों का कहना है कि NLPD हॉस्पिटल को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। क्षेत्रीय नागरिकों के मुताबिक अस्पताल में कई गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते, इसके बावजूद गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया जाता है। लोगों का आरोप है कि पूर्व में भी इलाज में लापरवाही और मरीजों की हालत बिगड़ने के कई मामले सामने आए, लेकिन हर बार मामला किसी न किसी तरह दबा दिया गया।
स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर अस्पताल की व्यवस्थाओं, डॉक्टरों की योग्यता और ब्लड चढ़ाने की प्रक्रिया की गहन जांच कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह की पीड़ा का सामना न करना पड़े।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद

















