उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘एक जनपद एक व्यंजन (ODOC)’ योजना लागू कर 75 जिलों के पारंपरिक व्यंजनों की पहचान तय की।
बाराबंकी की चंद्रकला सहित आगरा पेठा, मथुरा पेड़ा जैसे स्वाद शामिल।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश | 06 मई 2026
योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के खानपान को नई पहचान देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए ‘एक जनपद एक व्यंजन (ODOD)’ योजना लागू कर दी है।
इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के पारंपरिक और प्रसिद्ध व्यंजनों की मैपिंग पूरी कर ली गई है, जिससे अब हर जिले की अपनी अलग फूड पहचान तय हो गई है।
बाराबंकी से लेकर बनारस तक—हर स्वाद को मिली पहचान
इस पहल में प्रदेश के कई प्रसिद्ध व्यंजनों को प्रमुखता दी गई है, जिनमें शामिल हैं:
- बाराबंकी – चंद्रकला, लाल पेड़ा
- आगरा – पेठा
- मथुरा – पेड़ा
- वाराणसी – लस्सी, ठंडाई
- जौनपुर – इमरती
- गोरखपुर – समोसा
- मेरठ – गजक-रेवड़ी
- लखनऊ – मलाई मक्खन
- सहारनपुर – शहद
- मुजफ्फरनगर – गुड़
इसके अलावा कासगंज की सोन पापड़ी, अयोध्या की दही-जलेबी, बलिया का सत्तू और चित्रकूट का मावा जैसे स्थानीय स्वाद भी सूची में शामिल किए गए हैं।

कैबिनेट की मंजूरी, ‘टेस्ट ऑफ यूपी’ को मिलेगा बढ़ावा
हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गई।
🔹 हर क्षेत्र की खासियत एक प्लेटफॉर्म पर
- ब्रज की मिठास
- अवध की कचौड़ी-समोसा परंपरा
- पूर्वांचल का देसी स्वाद
- बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजन
इन सभी को जोड़कर “टेस्ट ऑफ यूपी” की अवधारणा को मजबूत किया जा रहा है।
रोजगार और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय स्तर पर काम करने वाले लोगों को मिलेगा।
🔹 किसे होगा फायदा?
- हलवाई और कारीगर
- छोटे दुकानदार
- फूड स्टार्टअप और उद्यमी
पारंपरिक व्यंजनों की मांग बढ़ने से स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और छोटे व्यापार को मजबूती मिलेगी।

फूड टूरिज्म से बढ़ेगा पर्यटन
योगी सरकार इस योजना को पर्यटन से जोड़कर “फूड टूरिज्म” को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है।
🔹 पर्यटकों को मिलेगा नया अनुभव
अब जब भी कोई पर्यटक किसी जिले में जाएगा, तो वहां के खास व्यंजन का स्वाद लेना उसकी यात्रा का अहम हिस्सा होगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की तैयारी
सरकार की योजना है कि इन पारंपरिक व्यंजनों को बेहतर:
- पैकेजिंग
- ब्रांडिंग
- मार्केटिंग
के जरिए वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जाए, जिससे यूपी के स्वाद को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके।

उत्तर प्रदेश के 75 जिले और उनके प्रमुख व्यंजन
अवध क्षेत्र
- लखनऊ – मलाई मक्खन, चाट
- बाराबंकी – चंद्रकला, लाल पेड़ा
- अयोध्या – दही-जलेबी, कचौड़ी
- सुल्तानपुर – पेड़ा, समोसा
- अमेठी – गुड़ की खीर, पूड़ी
- रायबरेली – मसाले
- उन्नाव – काला जामुन
- सीतापुर – मक्खन मलाई
- हरदोई – आलू पूरी
- लखीमपुर खीरी – खीर मोहन
पूर्वांचल
- वाराणसी – लस्सी, ठंडाई
- जौनपुर – इमरती
- गाजीपुर – जलेबी
- बलिया – सत्तू
- मऊ – लिट्टी-चोखा
- आजमगढ़ – तहरी
- देवरिया – मालपुआ
- गोरखपुर – समोसा
- कुशीनगर – केला चिप्स
- महाराजगंज – लिट्टी-चोखा
- संत कबीर नगर – पेड़ा
- सिद्धार्थनगर – कालानमक चावल
- बस्ती – ठेकुआ
- श्रावस्ती – इमरती
- बलरामपुर – नारियल बर्फी
- बहराइच – चमचम
- गोंडा – दही बड़ा
- अंबेडकर नगर – बालूशाही
पश्चिमी यूपी
- मेरठ – गजक, रेवड़ी
- गाजियाबाद – सोया चाप
- गौतम बुद्ध नगर – बेकरी उत्पाद
- हापुड़ – पापड़
- बुलंदशहर – खुरचन
- बागपत – घेवर
- मुजफ्फरनगर – गुड़
- शामली – गुड़ उत्पाद
- सहारनपुर – शहद
- बिजनौर – सिंघाड़ा कचौड़ी
- अमरोहा – आम पन्ना
- संभल – सेवइयां
- मुरादाबाद – दाल
- रामपुर – हलवा
ब्रज क्षेत्र
- आगरा – पेठा
- मथुरा – पेड़ा
- फिरोजाबाद – आलू टिक्की
- मैनपुरी – सोहन पापड़ी
- अलीगढ़ – इमरती
- हाथरस – रबड़ी
- कासगंज – सोन पापड़ी
- एटा – घेवर
बुंदेलखंड
- झांसी – दाल बाफला
- जालौन – रसगुल्ला
- ललितपुर – बाजरे की रोटी
- बांदा – सोहन हलवा
- चित्रकूट – मावा
- हमीरपुर – बुंदेली फरा
- महोबा – तिलकुट
कानपुर/मध्य यूपी
- कानपुर नगर – समोसा
- कानपुर देहात – लस्सी
- औरैया – देसी घी मिठाई
- इटावा – सरसों उत्पाद
- फर्रुखाबाद – दालमोठ
- कन्नौज – पेड़ा
प्रयागराज/विंध्य क्षेत्र
- प्रयागराज – कचौड़ी
- फतेहपुर – बेड़मी पूरी
- कौशांबी – गुड़ मिठाई
- प्रतापगढ़ – आंवला उत्पाद
- मिर्जापुर – लाल पेड़ा
- भदोही – दाल पीठा
- सोनभद्र – गुलाब जामुन
- चंदौली – काले चावल
निष्कर्ष
‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना उत्तर प्रदेश के समृद्ध खानपान को नई पहचान देने के साथ-साथ रोजगार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने वाला बड़ा कदम साबित हो सकती है। अब देखना होगा कि यह पहल जमीन पर कितनी तेजी से उतरती है और “टेस्ट ऑफ यूपी” को कितनी बड़ी पहचान दिला पाती है।
रिपोर्ट – नौमान माजिद















