बाराबंकी की बेलहरा नगर पंचायत में अवैध खनन का खेल जारी।
दिन रात मिट्टी से लदे ट्रैक्टर-डंपर सड़कों पर फर्राटा भर रहे।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 03 मई 2026
जिले की नगर पंचायत बेलहरा में अवैध खनन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। आरोप है कि खनन माफियाओं ने यहां कानून की धज्जियां उड़ाते हुए अपना नेटवर्क मजबूत कर लिया है और पीली मिट्टी की अवैध ढुलाई खुलेआम जारी है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, दिन ढलने के बाद भी यह अवैध कारोबार नहीं रुकता और रात 8 बजे तक मुख्य मार्गों पर मिट्टी से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर बेखौफ दौड़ते नजर आते हैं।

सड़कों की हालत खराब, धूल और जाम से लोग परेशान
अवैध खनन और मिट्टी की लगातार ढुलाई का सीधा असर क्षेत्र की सड़कों और जनजीवन पर पड़ रहा है।
बढ़ रही हैं समस्याएं
- भारी वाहनों के कारण सड़कें तेजी से टूट रही हैं
- धूल से हवा प्रदूषित, लोगों को सांस लेने में दिक्कत
- ट्रैफिक और आवाजाही में बाधा
ग्रामीणों का कहना है कि रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग मौन हैं।

“प्रशासन का नहीं है डर”, माफियाओं पर लगे गंभीर आरोप
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि खनन माफिया बिना किसी डर के यह अवैध कारोबार चला रहे हैं।
रात के अंधेरे में चलता है खेल
ग्रामीणों के अनुसार, अधिकतर ढुलाई रात के समय होती है ताकि कार्रवाई से बचा जा सके। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

सरकार को राजस्व का नुकसान, पर्यावरण पर भी खतरा
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा कारोबार नियम-कायदों को ताक पर रखकर संचालित किया जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है।
पर्यावरणीय खतरे बढ़े
- मिट्टी के अत्यधिक दोहन से जमीन की गुणवत्ता प्रभावित
- धूल प्रदूषण से स्वास्थ्य पर असर
- प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा

लोगों की मांग—तुरंत छापेमारी कर हो सख्त कार्रवाई
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगा संकट
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द रोक नहीं लगाई गई, तो सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाएंगी और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होगा।

निष्कर्ष
बेलहरा में अवैध खनन का यह मामला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
रिपोर्ट – नीरज निगम













