बाराबंकी में मिड डे मील योजना का औचक निरीक्षण।
कई स्कूलों में दूध वितरण न होने और एक स्कूल बंद मिलने जैसी अनियमितताएं सामने आईं।
डीएम ईशान प्रताप सिंह ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 29 अप्रैल 2026
बाराबंकी जिले में मिड डे मील योजना की जमीनी हकीकत जानने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।
जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह के निर्देश पर सिरौलीगौसपुर, रामनगर, हैदरगढ़ और फतेहपुर तहसीलों के परिषदीय विद्यालयों में उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों द्वारा औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान छात्र उपस्थिति, मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, दूध वितरण, साफ-सफाई और विद्यालय संचालन व्यवस्थाओं की गहन जांच की गई।
कई स्कूलों में मिली अनियमितताएं, दूध वितरण में लापरवाही उजागर
निरीक्षण में जहां कुछ स्कूलों की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई, वहीं कई जगह गंभीर खामियां भी सामने आईं—
तहसीलवार स्थिति
रामनगर तहसील:
- व्यवस्थाएं सामान्य रूप से संतोषजनक
हैदरगढ़ तहसील:
- अधिकांश स्कूल ठीक, लेकिन
- प्राथमिक विद्यालय भटखेरा में दूध वितरण नहीं हुआ
फतेहपुर तहसील:
- प्राथमिक विद्यालय मदनपुर में दूध समय से नहीं पहुंचा
सिरौलीगौसपुर तहसील:
- प्राथमिक विद्यालय श्यामनगर और मथनापुर में दूध नहीं मिला
- कम्पोजिट विद्यालय खलसापुर में सफाई व्यवस्था खराब
- प्राथमिक विद्यालय ठाकुरपुर निरीक्षण के दौरान बंद मिला

कम उपस्थिति भी बनी चिंता का विषय
कुछ विद्यालयों में नामांकन के मुकाबले छात्रों की उपस्थिति काफी कम पाई गई, जिस पर अधिकारियों ने गंभीरता जताते हुए सुधार के निर्देश दिए।
डीएम का सख्त संदेश—लापरवाही बर्दाश्त नहीं
जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए कि—
जहां भी अनियमितताएं पाई गई हैं, वहां
- ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक की जवाबदेही तय की जाएगी
- नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी
उन्होंने कहा कि मिड डे मील योजना की गुणवत्ता और बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

आगे भी जारी रहेंगे औचक निरीक्षण
प्रशासन ने साफ किया है कि इस तरह के औचक निरीक्षण आगे भी लगातार किए जाएंगे, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से बच्चों तक पहुंच सके।
जमीनी स्तर पर सुधार की जरूरत
बाराबंकी में मिड डे मील योजना की निगरानी को लेकर प्रशासन की सख्ती से साफ है कि अब स्कूलों में लापरवाही पर शिकंजा कसना तय है। हालांकि, सामने आई खामियां यह भी बताती हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी सुधार की बड़ी जरूरत है।
रिपोर्ट – मंसूफ़ अहमद













