Barabanki: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के कार्यकर्ताओं ने ईरान में हो रही घटनाओं के विरोध में प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान CPI नेताओं ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए।
जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश। 10 मार्च 2026
अमेरिका-इजराइल के हमलों में ईरानी जनता के हो रहे नरसंहार के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने भारतीय राजनेताओं पर ब्लैकमेल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि एप्सटीन फाइल्स में उनके नाम होने के चलते वे अमेरिका-इजराइल के हाथों ईरान में जनता के नरसंहार का विरोध करने से कतरा रहे हैं। अमेरिका भारत को कठपुतली की तरह नचा रहा है।
पार्टी सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि अंग्रेजों की गुलामी से आजादी के बाद देश में संविधान की व्यवस्था द्वारा देश के विकास और जनता की खुशहाली के प्रयास हुए। जनता द्वारा चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकारों की विदेश नीति और कूटनीति द्वारा विश्व में भारत को मान-सम्मान मिला। भारत को शांति एवं अहिंसा का दूत माना जाता रहा।

राज्य परिषद सदस्यों के मुख्य बयान
इंदिरा गांधी के नेतृत्व का किया जिक्र
राज्य परिषद सदस्य परवीन कुमार ने कहा कि स्व. इंदिरा गांधी के नेतृत्व में सोवियत संघ के साथ भारत ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बांटा। उस समय अमेरिका पाकिस्तान का साथ दे रहा था, लेकिन भारत ने कड़ा जवाब दिया। जबकि आज स्थिति उलट है। अमेरिका भारत को कठपुतली की तरह नचा रहा है।
BJP सरकार की नीतियों पर भी उठे सवाल
पार्टी कोषाध्यक्ष शिव दर्शन वर्मा ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चीन जमीन कब्जा कर रहा है, सरकार चुप है। हालिया ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 50 बार दावा किया कि उन्होंने युद्ध रोका।
किसान सभा अध्यक्ष का अमेरिका पर तीखा प्रहार
किसान सभा अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि ट्रंप ने भारत-पाक युद्ध रोका होने का दावा किया, लेकिन सरकार ने सफाई नहीं दी। रूस से सस्ता कच्चा तेल आयात पर अमेरिका ने दबाव डाला और टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी। ईरान पर अमेरिका-इजराइल हमले में राष्ट्राध्यक्ष की हत्या हुई, भारत चुप। ईरान ने कई बार भारत का साथ दिया। अब अमेरिका ने 30 दिनों के लिए रूस तेल आयात की अनुमति दी—क्या भारत की संप्रभुता गिरवी है?

प्रदर्शन में प्रमुख भागीदार
प्रदर्शन का नेतृत्व मो. कदीर ने किया। इसमें रामनरेश वर्मा, श्याम सिंह एडवोकेट, संतोष कुमार, राजेंद्र बहादुर सिंह, आलोक कुमार, आदित्य वर्मा, रीना मौर्य, आफरीन, अंकुल वर्मा, प्रेम चंद वर्मा, करन राजपूत, धर्मेंद्र शर्मा, सर्वेश यादव, राम नरेश वर्मा, दीपक वर्मा, सच्चिदानंद श्रीवास्तव, जितेंद्र श्रीवास्तव, मो. कासिफ, पवन वर्मा, राजकुमार वर्मा, लवकुश वर्मा, दीपक शर्मा, सुंदर लाल सोनी, संदीप तिवारी, संदीप वर्मा आदि शामिल रहे।

राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। इसमें ईरान की जनता के नरसंहार के खिलाफ भारत की सक्रिय भूमिका की मांग की गई।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद














