Barabanki:
बाराबंकी में जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन धीरेंद्र वर्मा और भाजपा नेता उमाशंकर वर्मा समेत 10 पर करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी का मुकदमा दर्ज। फर्जी दस्तावेज, अवैध ट्रांजैक्शन और बैंक खातों की गहन जांच शुरू।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश।
बाराबंकी में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन धीरेन्द्र कुमार वर्मा और भाजपा नेता उमाशंकर वर्मा सहित 10 लोगों के खिलाफ नगर कोतवाली में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई मुंशी रघुनंदन प्रसाद सरदार पटेल महिला कॉलेज से जुड़े बैंक खातों में करोड़ों रुपए की कथित हेराफेरी के मामले में न्यायालय के आदेश पर की गई है।
यह मामला कॉलेज की संस्थापक संरक्षक एवं प्रबंध कार्यकारिणी सदस्य कृष्णा चौधरी द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत वाद के आधार पर दर्ज हुआ है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के अनुपालन में नगर कोतवाली पुलिस ने एफआईआर पंजीकृत कर विवेचना शुरू कर दी है।
फर्जी दस्तावेजों से पदाधिकारी बनने का आरोप
न्यायालय में दाखिल वाद के अनुसार, उमाशंकर वर्मा और धीरेंद्र कुमार वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज के माध्यम से, बिना किसी वैध चुनाव और डिप्टी रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स अयोध्या की अनुमति के, स्वयं को संस्थान का पदाधिकारी घोषित कर लिया।
आरोप है कि 5 अप्रैल 2020, कोविड-19 के कारण लागू देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान, नियमों की अनदेखी करते हुए प्रबंध समिति की एक फर्जी बैठक दर्शाई गई। इस बैठक में 17 लोगों के कथित जाली हस्ताक्षर दिखाकर संस्थान का खाता जिला सहकारी बैंक में संचालित किया गया।

50 लाख रुपए का संदिग्ध आरटीजीएस ट्रांजैक्शन
शिकायत के अनुसार, इसी खाते से 8 नवंबर 2021 को बिना किसी वैध बिल या कार्यादेश के 50 लाख रुपए दयाराम एंड संस नामक ट्रेडिंग फर्म को आरटीजीएस के माध्यम से स्थानांतरित कर दिए गए।
इसके अलावा, उमाशंकर वर्मा द्वारा अपने पुत्र मानव पटेल के बैंक ऑफ इंडिया खाते में दो अलग-अलग अवसरों पर 10-10 लाख रूपये प्रबंध कार्यकारिणी की अनुमति के बिना ट्रांसफर कराए जाने का भी आरोप है। उस समय धीरेंद्र कुमार वर्मा जिला सहकारी बैंक के नामित चेयरमैन के पद पर कार्यरत थे।
कर्मचारियों के नाम पर निकासी, राशि नहीं मिली
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि इंडियन बैंक, मुख्य शाखा बाराबंकी में स्थित कॉलेज के खाते से कर्मचारियों के नाम पर धनराशि निकाली गई, लेकिन संबंधित कर्मचारियों को भुगतान नहीं किया गया। आरोप के अनुसार—
- अवधेश कुमार के नाम से 1.50 लाख रुपए
- अजय वर्मा के नाम से करीब 1.75 लाख रुपए
- अशोक और सुनील के नाम से 1.75-1.75 लाख रुपए
- राजीव के नाम से 1.50 लाख रुपए की निकासी दर्शाई गई।

2023 में भी संदिग्ध लेनदेन
इसके अतिरिक्त, 18 अगस्त 2023 को मान सिंह के खाते में 5 लाख रुपए आरटीजीएस के माध्यम से भेजे जाने का आरोप है। वही 20 अगस्त 2023 को सेल्फ चेक के जरिए—
- राकेश कुमार को 10 हज़ार रुपए,
- मान सिंह को 4 लाख रुपए,
- राकेश कुमार को 4 लाख रुपए,
- विजय कुमार को 4.50 लाख रुपए की निकासी किए जाने का भी उल्लेख है।
पुलिस ने शुरू की गहन जांच
नगर कोतवाल सुधीर कुमार सिंह के अनुसार, न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बैंक से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज और अभिलेख जब्त कर लिए गए हैं। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच की जा रही है और विवेचना पूरी होने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

पहले से विवादों में रहे हैं धीरेन्द्र कुमार वर्मा
गौरतलब है कि जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन धीरेन्द्र कुमार वर्मा हाल ही में जेल से बाहर आए हैं। उनके खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज है। इसके अलावा, सरकारी शिक्षक होते हुए राजनीति में सक्रिय रहने का मामला सामने आने के बाद पिछले वर्ष उन्हें सेवा से बर्खास्त किए जाने का प्रकरण भी सुर्खियों में रहा था।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद















