Barabanki News: बाराबंकी के देवा थाना क्षेत्र में जातिसूचक गाली, मारपीट और महिला का गला दबाने के आरोप। FIR और मेडिकल न होने का दावा कर सोनापति परिवार सहित धरने पर बैठीं। 3 नवंबर को लखनऊ विधानसभा तक पैदल मार्च की चेतावनी।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 2 नवंबर 2026
बाराबंकी में देवा थाना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जातिसूचक गाली देने, मारपीट करने, जबरन मैला उठवाकर बेइज्जत करने और महिला का गला दबाकर हत्या की कोशिश के आरोपों के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने का दावा करते हुए एक पीड़ित परिवार अब जिला प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठ गया है। पीड़िता सोनापति पत्नी लालता प्रसाद का आरोप है कि वह कई बार थाने से लेकर पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों तक शिकायत कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला।
पुलिस से कार्रवाई की उम्मीद छोड़कर परिवार ने सोमवार, 2 नवंबर से जिलाधिकारी कार्यालय परिसर स्थित गन्ना दफ्तर के धरना स्थल पर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पीड़िता ने चेतावनी दी है कि यदि 3 नवंबर को दोपहर 3 बजे तक मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह परिवार के साथ बाराबंकी से लखनऊ विधानसभा तक पैदल मार्च करेंगी और वहां न्याय मिलने तक अनिश्चितकालीन धरना देंगी।
पहले रिश्तेदार को जातिसूचक गालियां देने और मारपीट का आरोप
देवा थाना क्षेत्र के ग्राम पीड़ निवासी सोनापति ने पुलिस अधीक्षक रवीना त्यागी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 29 सितंबर 2026 की सुबह करीब छह बजे उनके पति लालता प्रसाद और उनके समधी श्यामलाल शौच के लिए गांव के पूरब खेतों की तरफ गए थे।
शिकायत के मुताबिक, श्यामलाल सड़क किनारे सरकारी खंती में शौच कर रहे थे, जबकि लालता प्रसाद कुछ दूरी पर थे। इसी दौरान हाजीपुर निवासी राम प्रकाश यादव उर्फ मोछई यादव वहां पहुंचे और कथित तौर पर श्यामलाल को गाली देते हुए शौच करने से रोकने लगे।
आरोप है कि राम प्रकाश यादव ने श्यामलाल और लालता प्रसाद को अपने पास बुलाया और श्यामलाल से हाथ से मैला उठाने को कहा। जब लालता प्रसाद ने विरोध करते हुए कहा कि उनके रिश्तेदार ने आरोपी के खेत में नहीं, बल्कि सड़क किनारे सरकारी खंती में शौच किया है, तो विवाद बढ़ गया।
पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद राम प्रकाश यादव ने दोनों के साथ जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया और श्यामलाल को लात-घूंसों तथा डंडे से पीटा। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि श्यामलाल से कथित तौर पर जबरन हाथ से मैला उठवाकर साफ कराया गया और दोबारा वहां दिखाई देने पर हाथ-पैर तोड़ने की धमकी दी गई।
अगले दिन विरोध करने पहुंची महिला से भी मारपीट का आरोप
सोनापति के अनुसार, 29 सितंबर की घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अगले दिन 30 सितंबर को सुबह करीब सात बजे अपने बेटे प्रवेश कुमार के साथ राम प्रकाश यादव से बात करने का फैसला किया।
शिकायत में आरोप है कि राम प्रकाश यादव उन्हें अपने खेत में मिल गए। जब सोनापति ने अपने रिश्तेदार को कथित तौर पर अपमानित करने और मैला उठवाने का कारण पूछा तो आरोपी ने उनके साथ भी जातिसूचक गालियों का इस्तेमाल किया।
पीड़िता का आरोप है कि राम प्रकाश यादव ने लात-घूंसों और डंडे से उनकी पिटाई की। इतना ही नहीं, उनका मुंह और गला दबाकर हत्या करने की कोशिश भी की गई। शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने दोबारा खेत के पास दिखाई देने पर हाथ-पैर तोड़कर विकलांग बनाने की धमकी दी।
सोनापति का दावा है कि इस घटना में उन्हें चोटें आईं और उनके शरीर पर चोट के निशान अब भी मौजूद हैं।
थाने में शिकायत के बावजूद मेडिकल और FIR नहीं होने का दावा
पीड़िता का सबसे गंभीर आरोप देवा थाना पुलिस की कार्रवाई को लेकर है। उनका कहना है कि 30 सितंबर की घटना के तत्काल बाद थाने में सूचना दी गई, लेकिन पुलिस ने न तो उनकी और अन्य घायलों की चोटों का मेडिकल परीक्षण कराया और न ही मुकदमा दर्ज किया।
सोनापति के मुताबिक, पुलिस उन्हें कार्रवाई का आश्वासन देकर बार-बार थाने बुलाती रही। इसके बाद उन्होंने 5 अक्टूबर और 14 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को प्रार्थना पत्र दिया। 16 अक्टूबर को क्षेत्राधिकारी नगर और अपर पुलिस अधीक्षक से भी मिलकर शिकायत की गई।
पीड़िता का आरोप है कि अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद अब तक उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसी कथित निष्क्रियता के विरोध में अब उन्हें धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
मुख्यमंत्री योगी को भी भेजा शिकायत पत्र, फिर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
सोनापति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। शिकायत में देवा थाना पुलिस पर जानबूझकर रिपोर्ट दर्ज नहीं करने और अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करने का आरोप लगाया गया है।
पीड़िता के अनुसार, उन्होंने 24 अक्टूबर को डाक और जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से मुख्यमंत्री सहित शासन और प्रशासन के अधिकारियों को ज्ञापन भेजा था। इसमें 2 नवंबर से 3 नवंबर की शाम तीन बजे तक गन्ना दफ्तर स्थित धरना स्थल पर प्रदर्शन करने और कार्रवाई नहीं होने पर लखनऊ विधानसभा तक पैदल मार्च करने की चेतावनी दी गई थी।
अब पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत 2 नवंबर को दोपहर 12 बजे से परिवार ने धरना शुरू कर दिया है।

दो प्रमुख मांगें, कार्रवाई नहीं हुई तो लखनऊ तक पैदल मार्च की चेतावनी
पीड़िता ने प्रशासन के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं।
- पहली मांग: 2 नवंबर को दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर राम प्रकाश यादव उर्फ मोछई यादव के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए और कानूनी कार्रवाई की जाए।
- दूसरी मांग: सोनापति, उनके पति लालता प्रसाद और श्यामलाल की चोटों का तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया जाए। साथ ही, पीड़िता का आरोप है कि शिकायत मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी विधि के अनुसार कार्रवाई की जाए।
सोनापति ने चेतावनी दी है कि यदि 3 नवंबर को दोपहर तीन बजे तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह परिवार सहित धरना स्थल से लखनऊ विधानसभा तक पैदल मार्च करेंगी। वहां न्याय मिलने तक अनिश्चितकालीन धरना देने की बात भी कही गई है।
सवालों के घेरे में देवा थाना पुलिस की कार्रवाई
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पीड़िता की शिकायत में लगाए गए आरोप गंभीर हैं तो अब तक शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई? पीड़िता का दावा है कि उन्होंने कई स्तरों पर अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला।
फिलहाल, परिवार गन्ना दफ्तर में धरना दे रहा है और प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहा है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी सामने आना बाकी है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












