Barabanki News: बाराबंकी के CHC घुंघटेर में नवजात बदलने का गंभीर आरोप लगा है।
पिता का दावा बेटे का जन्म हुआ, लेकिन बच्ची सौंप दी गई।
डिस्चार्ज पर्ची में काट-छांट के आरोप के बाद CMO ने DNA जांच के आदेश दिए।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 27 अगस्त 2026
एक तरफ प्रसव के बाद जिंदगी और मौत से जूझ रही मां… दूसरी तरफ नवजात बच्चे के जन्म की खुशी… लेकिन कुछ ही देर बाद ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया।
बाराबंकी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुंघटेर के डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों पर नवजात बदलने का गंभीर आरोप लगा है। बिजौली मजरे सिंगतरा निवासी राजेश कुमार का दावा है कि उनकी पत्नी रीतू ने 13 अगस्त को बेटे को जन्म दिया था। जन्म के समय पिता और आशा बहू ने बच्चे को देखा और उनके मुताबिक नवजात लड़का था।
लेकिन अस्पताल से रेफर होने के बाद जब राजेश ने रास्ते में बच्चे को देखा तो उनके होश उड़ गए। जिसे वह अपना बेटा समझकर अस्पताल से लेकर निकले थे, वह बच्ची निकली।
और यहीं से शुरू हुआ वह सवाल, जिसका जवाब अब DNA जांच से मिलने वाला है।
जन्म के समय ‘बेटा’, कुछ देर बाद ‘बेटी’ कैसे?
घुंघटेर थाना क्षेत्र के ग्राम बिजौली मजरे सिंगतरा निवासी राजेश कुमार ने सीएमओ बाराबंकी को दिए प्रार्थना पत्र में पूरे घटनाक्रम का विवरण दिया है।
राजेश के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को उनकी पत्नी रीतू को प्रसव पीड़ा हुई। उन्होंने एंबुलेंस के लिए फोन किया, लेकिन एंबुलेंस आने में देरी हुई। हालात बिगड़ने पर रीतू ने रास्ते में एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म दिया।
राजेश का दावा है कि उस समय उनके साथ आशा बहू राधिका भी मौजूद थीं। प्रसव के बाद पिता और आशा बहू ने नवजात के लिंग को देखा। राजेश का कहना है कि नवजात लड़का था।
यही नहीं, उनका दावा है कि जब जच्चा-बच्चा को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुंघटेर पहुंचाया गया तो वहां मौजूद नर्स और डॉक्टर ने भी उन्हें बेटे के जन्म की जानकारी दी।
उस समय परिवार के लिए यह राहत की बात थी कि बच्चा सुरक्षित है। लेकिन उन्हें क्या पता था कि कुछ ही देर बाद यही बच्चा पूरे मामले की सबसे बड़ी पहेली बन जाएगा।
CHC में मां का इलाज, लेकिन बढ़ता गया रक्तस्राव
राजेश के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टर और नर्स ने रीतू का इलाज शुरू किया, लेकिन रीतू का रक्तस्राव काफी अधिक हो रहा था।
परिजनों को बताया गया कि हालत गंभीर है और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं से आगे इलाज संभव नहीं है। उसे किसी बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।
राजेश ने अस्पताल से एंबुलेंस उपलब्ध कराने की बात कही। उनके अनुसार, अस्पताल की ओर से बताया गया कि उस समय एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है और मरीज को निजी वाहन से ले जाना होगा। इसके बाद राजेश निजी वाहन की व्यवस्था करने के लिए अस्पताल से बाहर निकले।
यहीं से घटनाक्रम को लेकर एक और गंभीर सवाल सामने आता है।
‘10 मिनट बाद अंदर जाइए’… फिर शुरू हुआ रहस्य
राजेश का आरोप है कि निजी वाहन की व्यवस्था करने के बाद जब वह दोबारा अस्पताल के अंदर जाने लगे तो स्टाफ नर्स ने उन्हें रोक दिया। कथित तौर पर उनसे कहा गया कि कुछ देर बाद अंदर जा सकते हैं।
राजेश के मुताबिक, करीब 10 मिनट बाद जब वह अंदर पहुंचे तो उन्होंने अपनी पत्नी को गंभीर हालत में पाया।उनका कहना है कि उन्हें बताया गया कि रीतू बेहोश है और उसे तत्काल बड़े अस्पताल ले जाना होगा।
राजेश आनन-फानन में जच्चा और बच्चे को लेकर लखनऊ के लिए निकल पड़े। लेकिन बाद में लखनऊ के अस्पताल में जो जानकारी मिली, उसने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।
लखनऊ पहुंचते ही खुला मां की मौत का सच
राजेश के मुताबिक, गांधी मेमोरियल एंड एसोसिएट हॉस्पिटल, लखनऊ में डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि रीतू की पहले ही मौत हो चुकी थी। अस्पताल की ओर से उसका डेथ सर्टिफिकेट भी जारी किया गया।
एक तरफ पत्नी की मौत का सदमा था, दूसरी तरफ नवजात बच्चे की जिम्मेदारी। राजेश मृत पत्नी और नवजात को लेकर वापस बाराबंकी के घुंघटेर अस्पताल पहुंचे।
लेकिन उन्हें अभी एक और बड़ा झटका लगना बाकी था।
रास्ते में बच्चे को देखा तो उड़ गए होश
राजेश के मुताबिक, CHC से निकलते समय आशा बहू राधिका ने नवजात को कपड़े में लपेटकर उन्हें दिया था। उस समय उन्होंने बच्चे को खोलकर नहीं देखा। लेकिन रास्ते में जब उन्होंने बच्चे को देखा तो उनके होश उड़ गए। क्योंकि, नवजात लड़का नहीं बल्कि लड़की थी।
राजेश के मुताबिक, उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि ऐसा कैसे हो सकता है। उन्होंने तत्काल आशा बहू राधिका को फोन किया और आरोप लगाया कि CHC घुंघटेर में उनका बच्चा बदल दिया गया है।
राजेश के अनुसार, आशा बहू ने उन्हें अस्पताल वापस आने की बात कही और यह भी कहा कि बच्चा लड़का ही था।
यहीं से मामला और उलझ गया। अगर जन्म के समय बच्चा लड़का था और अस्पताल में भी लड़का बताया गया था, तो फिर परिवार को बच्ची कैसे सौंप दी गई?

रेफरल पर्ची बनी मामले की सबसे अहम कड़ी
राजेश ने अपनी शिकायत में अस्पताल की रेफरल पर्ची का भी जिक्र किया है। उनका दावा है कि रेफर करते समय पर्ची में बच्चे के लिंग वाले कॉलम में ‘लड़का’ के सामने टिक किया गया था।
लेकिन बाद में उसे कथित तौर पर काट-छांट कर ‘लड़की’ के सामने टिक कर दिया गया। यानी दस्तावेज में भी वही बदलाव नजर आया, जिसकी शिकायत परिवार कर रहा था।
अब सवाल सिर्फ बच्चे के बदलने का नहीं है। सवाल यह भी है कि दस्तावेज में यह बदलाव कब हुआ, किसने किया और क्यों किया?
क्या यह महज लिखने की गलती थी? या फिर दस्तावेज में बाद में कोई परिवर्तन किया गया? इसका जवाब जांच में सामने आना बाकी है।
परिवार ने अस्पताल में दूसरे नवजात भी देखने की मांग की
राजेश के अनुसार, जब उन्हें बच्चे के बदलने का शक हुआ तो उन्होंने अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती अन्य महिलाओं और उनके नवजात बच्चों से संबंधित जानकारी देखने की कोशिश की।
परिवार का दावा है कि उन्होंने वहां मौजूद कुछ नवजात बच्चों को देखा, वो सभी लड़के थे।
पिता की मांग- ‘मुझे मेरा बच्चा चाहिए’
राजेश कुमार ने CMO, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उनकी मांग है कि:
- नवजात का DNA टेस्ट कराया जाए।
- अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की जाए।
- डिस्चार्ज पर्ची में हुई कथित काट-छांट की जांच हो।
- प्रसव के समय मौजूद डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की जाए।
- एंबुलेंस और रेफर प्रक्रिया की भी जांच हो।
यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
शिकायत के बाद CMO ने दिए DNA जांच के आदेश
परिवार की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने DNA जांच के आदेश दिए हैं। अब इस पूरे मामले में DNA रिपोर्ट सबसे अहम सबूत बन सकती है।
अगर DNA मैच करता है तो बच्चे की पहचान को लेकर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। अगर DNA मैच नहीं करता, तो फिर अस्पताल में नवजात के बदलने के आरोप की जांच और गंभीर हो जाएगी।
पत्नी की मौत और बच्चे की पहचान का रहस्य… दोनों का जवाब बाकी
इस पूरे मामले में एक पति पहले ही अपनी पत्नी को खो चुका है। उसके सामने अब दूसरा सवाल खड़ा है—जो नवजात उसे दिया गया है, क्या वह वास्तव में उसका अपना बच्चा है?
एक तरफ पिता का दावा है कि बेटे का जन्म हुआ था। दूसरी तरफ उसके हाथ में बच्ची है। बीच में अस्पताल की एक ऐसी पर्ची है, जिसमें परिवार के मुताबिक पहले ‘लड़का’ लिखा था और बाद में उसे काटकर ‘लड़की’ कर दिया गया।
रहस्य काफी गहरा है और अगर कोई इस रहस्य से पर्दा उठा सकता है तो वो है—DNA जांच।
फिलहाल नवजात बदलने के आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन शिकायत, दस्तावेज में कथित बदलाव और DNA जांच के आदेश ने मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर हैं—क्योंकि DNA ही बताएगा कि राजेश कुमार की गोद में आया नवजात उनका अपना बच्चा है या इस कहानी में अभी कोई और सच सामने आना बाकी है।
रिपोर्ट – ललित राजवंशी













