Barabanki: शिक्षा के मंदिर को किया शर्मसार, आरोपी बाबू के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
बाराबंकी के लोनी कटरा थाना क्षेत्र में सरकारी इंटर कॉलेज के बाबू पर हाईस्कूल की मार्कशीट लेने आई छात्रा से छेड़खानी और अश्लील वीडियो दिखाने का आरोप। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच जारी।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 08 फरवरी 2026
बाराबंकी जिले के लोनी कटरा थाना क्षेत्र से एक शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की साख कर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक सरकारी इंटर कॉलेज में हाईस्कूल की मार्कशीट लेने पहुंची 20 वर्षीय छात्रा के साथ कॉलेज के बाबू (क्लर्क) ने कथित तौर पर छेड़खानी और अश्लील हरकतें की। आरोप है कि आरोपी ने मार्कशीट देने के बहाने छात्रा को गंदे वीडियो दिखाए और आपत्तिजनक व्यवहार किया।
मार्कशीट के बहाने की गई अभद्रता
पीड़िता के अनुसार, 06 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 1 बजे लोनी कटरा थाना क्षेत्र के त्रिवेदीगंज स्थित सरस्वती जयंती इंटर कॉलेज में अपनी हाईस्कूल की मार्कशीट लेने पहुंची थी। उसी दौरान कॉलेज के बाबू विद्याधर शुक्ल ने उससे अभद्र बातचीत शुरू कर दी। जब छात्रा ने अंकपत्र देने की बात कही, तो आरोपी ने टालमटोल करते हुए अपने मोबाइल फोन में गंदी वीडियो दिखाने शुरू कर दिए।
मोबाइल में रिकॉर्ड की आरोपी की हरकत
छात्रा का आरोप है कि बाबू की हरकतों से डरने के बावजूद उसने साहस दिखाते हुए अपने मोबाइल फोन में आरोपी की गतिविधियों का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। इसी दौरान आरोपी ने उसे पीछे से पकड़ लिया, जिससे छात्रा गिर गई तो आरोपी उसके प्राइवेट अंगों को अपने हाथों से दबाने लगा। किसी तरह उस दरिंदे से खुद को बचाकर छात्रा वहां से निकलने में कामयाब रही।
परिजनों ने थाने में दी तहरीर
घटना से घबराई छात्रा ने घर पहुंचकर पूरी आपबीती परिजनों को सुनाई। साथ ही मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया गया वीडियो भी दिखाया। जिसे देखकर परिजन आक्रोशित हो गए और लोनी कटरा थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
इस संबंध में लोनी कटरा थाना प्रभारी अभय मौर्य ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर आरोपी कॉलेज बाबू विद्याधर शुक्ल के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रहा था और साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना न सिर्फ छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि जिन संस्थानों को ज्ञान और संस्कार का केंद्र माना जाता है, वहां इस तरह की घटनाएं कितनी चिंताजनक हैं।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद













