बाराबंकी के ग्रामीण इलाकों में ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत लगे कई CCTV कैमरे रिचार्ज और रखरखाव के अभाव में बंद बताए जा रहे हैं। निगरानी व्यवस्था पर सवाल, ग्रामीणों ने कैमरे चालू कराने की मांग की।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 18 अक्टूबर 2026
बाराबंकी के ग्रामीण इलाकों में अपराध पर अंकुश लगाने और गांवों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया ऑपरेशन त्रिनेत्र अब रखरखाव और रिचार्ज की अनदेखी के चलते सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायतों के प्रमुख तिराहों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे कहीं महीनों से बंद पड़े हैं, तो कहीं तकनीकी खराबी के कारण रिकॉर्डिंग नहीं हो रही है। ऐसे में सरकारी खर्च से तैयार की गई निगरानी व्यवस्था का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कई कैमरों का इंटरनेट या सिम रिचार्ज समय पर नहीं कराया गया। कुछ कैमरों में तकनीकी खामियां हैं, जबकि सोलर पैनल से चलने वाले उपकरण भी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। कैमरों के बंद रहने से अपराधियों पर नजर रखने और किसी घटना के बाद साक्ष्य जुटाने में मुश्किलें आने की आशंका है। खासकर रात के समय सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों, महिलाओं और बुजुर्गों की चिंता बढ़ गई है।
ऑपरेशन त्रिनेत्र की निगरानी व्यवस्था पर सवाल, रिचार्ज के अभाव में बंद पड़े कैमरे
ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध और अपराधियों पर निगरानी रखने के उद्देश्य से ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायतों और उनके मजरों में प्रमुख स्थानों तथा सार्वजनिक स्थलों पर कैमरे लगाने का काम किया गया था। इन कैमरों का उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर पुलिस को घटनाओं से जुड़े फुटेज उपलब्ध कराना था।
शुरुआत में कैमरे काम कर रहे थे, लेकिन समय के साथ उनके रिचार्ज और रखरखाव की व्यवस्था प्रभावित होने लगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगह तीन से छह महीने के भीतर ही रिचार्ज खत्म हो गया और दोबारा रिचार्ज नहीं कराए जाने से कैमरे बंद हो गए। कुछ स्थानों पर कैमरे छह से आठ महीने से निष्क्रिय बताए जा रहे हैं।
इसका नतीजा यह है कि जिन तिराहों, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर कैमरे अपराध रोकने और निगरानी में मदद के लिए लगाए गए थे, वहां अब केवल उपकरण नजर आते हैं, लेकिन उनकी रिकॉर्डिंग नहीं हो रही।
इंटरनेट और सिम रिचार्ज खत्म, तकनीकी खराबी भी बनी समस्या
सीसीटीवी कैमरों के बंद होने के पीछे इंटरनेट कनेक्शन, सिम रिचार्ज और रखरखाव से जुड़ी समस्याएं बताई जा रही हैं। जानकारी के मुताबिक, जिन कैमरों में सिम या इंटरनेट कनेक्टिविटी के जरिए फुटेज उपलब्ध कराने की व्यवस्था थी, उनमें रिचार्ज खत्म होने के बाद निगरानी प्रभावित हो गई।
सोलर पैनल वाले कैमरों में भी तकनीकी खामियां
कुछ स्थानों पर सोलर पैनल से संचालित कैमरों में तकनीकी दिक्कतें बताई जा रही हैं। ऐसे उपकरणों की नियमित जांच और मरम्मत नहीं होने से उनकी उपयोगिता प्रभावित हुई है।
ग्राम प्रधानों के मोबाइल से जोड़े गए थे कैमरे
योजना के तहत कैमरों के फुटेज ग्राम प्रधानों के मोबाइल फोन से जोड़ने की व्यवस्था किए जाने की जानकारी है। इससे स्थानीय स्तर पर निगरानी रखने में मदद मिल सकती थी। लेकिन कनेक्टिविटी और रखरखाव की समस्या के कारण कई स्थानों पर यह व्यवस्था प्रभावी नहीं रह गई है।

कैमरे बंद होने से अपराध नियंत्रण और जांच पर असर की आशंका
सीसीटीवी कैमरे किसी घटना के समय संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों, वाहनों और घटनास्थल से जुड़े दृश्य रिकॉर्ड करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन कैमरे बंद होने पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं रहती। ऐसे में चोरी, छिनैती या अन्य आपराधिक घटनाओं के बाद फुटेज के जरिए सुराग जुटाना मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्य चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर कैमरे लगे होने के बावजूद यदि उनकी रिकॉर्डिंग ही नहीं हो रही है, तो सुरक्षा व्यवस्था का अपेक्षित लाभ कैसे मिलेगा? लोगों ने कैमरों को दोबारा चालू कराने और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की जरूरत बताई है।
महिलाओं और बुजुर्गों में सुरक्षा को लेकर चिंता
गांवों के सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी कैमरे होने से स्थानीय लोगों को सुरक्षा का भरोसा मिलता है। खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और देर शाम आने-जाने वाले लोगों के लिए ऐसी व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।
लेकिन कैमरे निष्क्रिय रहने से ग्रामीणों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि किसी घटना की स्थिति में निगरानी व्यवस्था कितनी मददगार होगी। लोगों का कहना है कि कैमरों को सिर्फ लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें नियमित रूप से चालू रखना भी जरूरी है।
रखरखाव की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करने की जरूरत
ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए गए कैमरों की उपयोगिता बनाए रखने के लिए नियमित रखरखाव, समय पर रिचार्ज और तकनीकी जांच जरूरी है। स्थानीय स्तर पर कैमरों की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार कर बंद उपकरणों की पहचान और मरम्मत की व्यवस्था किए जाने की जरूरत है।
प्रशासन और ग्राम पंचायतों को उठाने होंगे जरूरी कदम
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित अधिकारी ग्राम पंचायतवार सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की जांच कराएं। जो कैमरे रिचार्ज खत्म होने के कारण बंद हैं, उन्हें चालू कराया जाए और तकनीकी रूप से खराब उपकरणों की मरम्मत या जरूरत के अनुसार बदलाव किया जाए।
इसके साथ ही कैमरों के इंटरनेट खर्च, रखरखाव और मरम्मत के लिए जिम्मेदार विभाग या अधिकारी की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि भविष्य में यही समस्या दोबारा न आए।
सरकारी खर्च से बनी व्यवस्था का लाभ कब मिलेगा?
ऑपरेशन त्रिनेत्र का उद्देश्य गांवों में निगरानी मजबूत करना और अपराध नियंत्रण में पुलिस की मदद करना है। लेकिन यदि कैमरे रिचार्ज और रखरखाव के अभाव में महीनों तक बंद रहते हैं, तो योजना का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग कैमरों की वास्तविक स्थिति का आकलन करें, खराब उपकरणों को चालू कराएं और नियमित निगरानी की व्यवस्था बनाएं। ग्रामीणों को इंतजार है कि ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत लगे कैमरे दोबारा सक्रिय होंगे और गांवों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएंगे।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद
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