बाराबंकी में भारी बारिश और जलभराव के बीच 26 सितंबर को छात्रों की छुट्टी के बावजूद शिक्षकों को स्कूल बुलाने पर शिक्षक संगठनों में आक्रोश है। BSA से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 28 सितंबर 2026
बाराबंकी में 25 और 26 सितंबर को हुई अत्यधिक बारिश, जलभराव और प्रतिकूल मौसम के बीच छात्र-छात्राओं के लिए अवकाश घोषित किए जाने के बावजूद शिक्षकों को विद्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए जाने पर शिक्षक संगठनों में नाराजगी सामने आई है। शिक्षक संगठनों ने प्रतिकूल मौसम में शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भारी बारिश और जलभराव के कारण बच्चों के लिए अवकाश घोषित किया गया था, तो शिक्षकों को भी परिस्थितियों के अनुरूप राहत दिए जाने पर विचार किया जाना चाहिए था।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि कई क्षेत्रों में जलभराव और खराब मौसम के कारण आवागमन चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद शिक्षकों ने अपने दायित्व के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए विषम परिस्थितियों में विद्यालय पहुंचकर काम किया। वहीं, इसी दौरान सघन विद्यालय निरीक्षण किए जाने को लेकर भी शिक्षक संगठनों में नाराजगी रही।
छात्रों की छुट्टी, शिक्षकों की उपस्थिति पर उठे सवाल
शिक्षक संगठनों के मुताबिक 26 सितंबर को प्रतिकूल मौसम को देखते हुए छात्र-छात्राओं के लिए अवकाश घोषित किया गया था। हालांकि, शिक्षकों को विद्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए।
संगठनों का कहना है कि 25 और 26 सितंबर को हुई लगातार बारिश और कई स्थानों पर जलभराव के कारण सड़क मार्ग से आवागमन मुश्किल था। ऐसी परिस्थितियों में विद्यालय तक पहुंचने के दौरान शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर भी जोखिम बना हुआ था।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि शिक्षकों ने परिस्थितियों की कठिनाइयों के बावजूद अपने दायित्वों का निर्वहन किया और विद्यालय पहुंचकर कार्य किया।
शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
शिक्षक संगठनों ने कहा कि अत्यधिक बारिश और जलभराव जैसी परिस्थितियों में शिक्षकों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में विद्यालयों में उपस्थिति से संबंधित निर्णय लेते समय स्थानीय परिस्थितियों, सड़क की स्थिति और आवागमन की सुरक्षा का आकलन किया जाना जरूरी है।
बारिश के दौरान सघन निरीक्षण पर भी नाराजगी
शिक्षक संगठनों ने भारी बारिश के दौरान किए गए सघन विद्यालय निरीक्षण को लेकर भी नाराजगी जताई है।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि जब मौसम बेहद खराब हो और कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी हो, उस समय शिक्षकों और अधिकारियों दोनों के लिए आवागमन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में निरीक्षण की प्रक्रिया में भी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
संगठनों ने इसे शिक्षकों की सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा विषय बताया है।
कई शिक्षक संगठनों ने उठाई आवाज
शिक्षकों की सुरक्षा के मुद्दे पर विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने अपनी चिंता जाहिर की।
इस संबंध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के डॉ. राकेश कुमार सिंह और पवन कुमार वर्मा, उत्तर प्रदेशीय जूनियर शिक्षक संघ के धर्मेंद्र कुमार, यूटा के आशुतोष कुमार, शैक्षिक महासंघ के सुनील कुमार तथा अटेवा के अमित वर्मा सहित शिक्षक नेताओं ने शिक्षकों की सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देने की मांग उठाई।
अन्य शिक्षक पदाधिकारियों ने भी जताई चिंता
इस दौरान उमा नाथ मिश्र, विकास वर्मा, आशीष सिंह, पूर्णेश प्रताप सिंह, राजेश श्रीवास्तव, संतोष वर्मा, श्याम किशोर बाजपेई, रवि भदौरिया, दिलीप तिवारी और जय कुमार सहित अन्य शिक्षक पदाधिकारियों ने भी प्रतिकूल मौसम में शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की।
BSA से परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने की मांग
शिक्षक संगठनों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) से मांग की है कि भविष्य में अत्यधिक बारिश, जलभराव या अन्य असाधारण प्राकृतिक परिस्थितियों में शिक्षकों की विद्यालय में उपस्थिति को लेकर निर्णय लेते समय जमीनी परिस्थितियों का आकलन किया जाए।
संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल प्रशासनिक निर्देश जारी करने के बजाय मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
सुरक्षा, गरिमा और दायित्व में संतुलन की मांग
शिक्षक संगठनों ने कहा कि शिक्षक अपने दायित्वों से पीछे नहीं हटना चाहते, लेकिन असाधारण मौसम की परिस्थितियों में उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
संगठनों ने मांग की कि शिक्षकों की सुरक्षा, गरिमा और उनके दायित्वों के बीच संतुलन कायम रखते हुए भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
बारिश और जलभराव में स्कूल व्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंता
बाराबंकी में सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई भारी बारिश और जलभराव के बीच स्कूलों की व्यवस्था को लेकर यह मामला सामने आया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि भविष्य में मौसम संबंधी गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए विद्यालय संचालन और कर्मचारियों की उपस्थिति से जुड़े निर्णय स्थानीय स्तर की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए।
फिलहाल शिक्षक संगठनों ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से इस मामले में व्यावहारिक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने तथा भविष्य में ऐसी परिस्थितियों के लिए स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद
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