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Barabanki: रामनगर में प्रस्तावित बाईपास पर बढ़ा विवाद, जनहित याचिका के बाद NHAI टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण

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Barabanki News: बाराबंकी के रामनगर में साधारणपुर से नचना तक प्रस्तावित बाईपास के विरोध में जनहित याचिका के बाद NHAI टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया। पढ़े पूरी खबर विस्तार से 

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 08 सितंबर 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रामनगर क्षेत्र में साधारणपुर से नचना तक प्रस्तावित बाईपास को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। प्रस्तावित बाईपास के विरोध में दाखिल जनहित याचिका के बाद मंगलवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों की टीम रामनगर पहुंची और मौके पर स्थलीय निरीक्षण किया।

न्यायालय के आदेश के बाद पहुंची टीम ने प्रस्तावित बाईपास के स्थान, मौजूदा सड़क की स्थिति और आसपास के क्षेत्र का जायजा लिया। अधिकारियों ने सड़क किनारे की स्थिति के साथ आसपास के गांवों और प्रस्तावित मार्ग से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की भी जानकारी जुटाई।

अब स्थलीय निरीक्षण में सामने आए तथ्यों और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर NHAI की टीम की ओर से न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

बाईपास के विरोध में दाखिल की गई जनहित याचिका

रामनगर क्षेत्र के मड़ना निवासी पूर्व ब्लॉक प्रमुख जगदीश और शंकर फार्म, असंद्रा निवासी सुरेंद्र विक्रम सिंह ने प्रस्तावित बाईपास के विरोध में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

याचिकाकर्ताओं ने जनहित याचिका में प्रस्तावित बाईपास को निरस्त करने समेत कई मांगें उठाई हैं। उनका तर्क है कि रामनगर से प्रसिद्ध लोधेश्वर महादेव मंदिर तक आवागमन के लिए पहले से सड़क की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है।

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लोधेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और पूरे वर्ष यहां श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है। सावन, महाशिवरात्रि समेत प्रमुख धार्मिक पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने बताया मौजूदा सड़क का विकल्प

याचिका में दावा किया गया है कि रामनगर क्षेत्र में पहले से फोरलेन सड़क और नाला बना हुआ है। इसके अलावा बुढ़वल मोड़ से महादेवा मोड़ तक करीब 45 मीटर चौड़ा कॉरिडोर भी उपलब्ध है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसी स्थिति में नई बाईपास सड़क बनाने के बजाय मौजूदा सड़क के अलाइनमेंट को बरकरार रखते हुए यातायात सुधार के दूसरे विकल्प अपनाए जा सकते हैं।

एलीवेटेड रोड और अंडरपास का दिया विकल्प

याचिकाकर्ताओं ने यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एलीवेटेड रोड, सर्विस रोड और अंडरपास जैसे विकल्पों का सुझाव दिया है।

उनका तर्क है कि इन विकल्पों के जरिए मौजूदा सड़क का उपयोग करते हुए यातायात को सुगम बनाया जा सकता है और नई बाईपास परियोजना की आवश्यकता पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

जमीनों की खरीद-फरोख्त की जांच की भी मांग

जनहित याचिका में प्रस्तावित बाईपास को अनावश्यक बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग के साथ एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया गया है।

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याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से मांग की है कि गजट प्रकाशन से पहले प्रस्तावित बाईपास के अलाइनमेंट में आने वाली जमीनों की हुई खरीद-फरोख्त की जांच कराई जाए।

यह मांग भी अब मामले की न्यायिक सुनवाई का हिस्सा है। हालांकि जमीनों की खरीद-फरोख्त से जुड़े किसी भी आरोप या अनियमितता की पुष्टि संबंधित जांच अथवा सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट के बाद ही होगी।

NHAI टीम ने मौके पर क्या देखा?

न्यायालय के आदेश के बाद मंगलवार को NHAI अधिकारियों की टीम प्रस्तावित बाईपास क्षेत्र में पहुंची। टीम ने मौके पर प्रस्तावित मार्ग की स्थिति देखने के साथ मौजूदा सड़क, आसपास के गांवों और सड़क किनारे मौजूद परिस्थितियों का निरीक्षण किया।

अधिकारियों ने संबंधित बिंदुओं की जानकारी जुटाई और प्रस्तावित परियोजना से जुड़े स्थल की स्थिति को समझने का प्रयास किया।

अब निरीक्षण के दौरान जुटाई गई जानकारी को रिपोर्ट के रूप में न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा। बाईपास को लेकर अंतिम स्थिति न्यायालय की कार्यवाही और संबंधित विभाग की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है रामनगर क्षेत्र

रामनगर क्षेत्र में लोधेश्वर महादेव मंदिर के कारण धार्मिक गतिविधियों के दौरान यातायात का दबाव बढ़ जाता है। खासकर सावन और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

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ऐसे में प्रस्तावित बाईपास को लेकर एक तरफ बेहतर यातायात व्यवस्था की जरूरत का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ याचिकाकर्ताओं ने मौजूदा सड़क और वैकल्पिक यातायात व्यवस्था के आधार पर नई परियोजना की जरूरत पर सवाल उठाया है।

फिलहाल NHAI के स्थलीय निरीक्षण के बाद पेश होने वाली रिपोर्ट और न्यायालय के अगले आदेश पर सभी की नजरें टिकी हैं।

रिपोर्ट – निरंकार त्रिवेदी 

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Author: Kamran Alvi

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