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Barabanki: पूरे गुमान कांड में नया मोड़! बुजुर्ग की हत्या के बाद पीड़ित परिवार पर ही बलवे की FIR, पुलिस पर भाजपा विधायक और करणी सेना के दबाव में सरेंडर का आरोप

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Barabanki News: सुबेहा थाना क्षेत्र के पूरे गुमान कांड में नया मोड़ आया है।

शमशेर अली की मौत के बाद मृतक पक्ष की युवतियों समेत 15 लोगों पर FIR से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 24 अगस्त 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सुबेहा थाना क्षेत्र के पूरे गुमान कोलवा में 16 अगस्त को ट्रैक्टर से कुचलकर हुई बुजुर्ग शमशेर अली की हत्या और महिलाओं-युवतियों से मारपीट की घटना अब एक नए विवाद में घिर गई है। जिस मामले में पुलिस ने पहले ठाकुर बिरादरी के आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, उसी मामले में अब मृतक पक्ष की महिलाओं और युवतियों समेत 15 नामजद लोगों के खिलाफ बलवा और घातक हथियारों से हमला करने जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद क्रॉस एफआईआर दर्ज की है या फिर स्थानीय भाजपा विधायक और करणी सेना की ओर से बनाए गए दबाव के बाद मृतक के परिजनों को ही आरोपी बना दिया गया?

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि मृतक पक्ष की ओर से घटना के कई वीडियो मौजूद होने का दावा किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर क्रॉस एफआईआर में जिस जमीन पर ट्रैक्टर चलाने के दौरान जानलेवा हमले की बात कही गई है, उसके रकबे और खतौनी में दर्ज हिस्सेदारी को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

जिस जमीन पर ट्रैक्टर चलाने का दावा, उसमें आरोपी पक्ष की हिस्सेदारी सिर्फ 97 वर्गफीट!

मामले में दर्ज कराई गई तहरीर में सीमा सिंह ने दावा किया है कि उनका बेटा रोशन सिंह उर्फ शिव सिंह गाटा संख्या 402 की अपनी बाग की जमीन पर ट्रैक्टर से जुताई कर रहा था, तभी विपक्षी अजमत अली पक्ष के लोगों ने उस पर हमला कर दिया।

लेकिन उपलब्ध खतौनी के अनुसार गाटा संख्या 402 का कुल रकबा ही मात्र 0.0310 हेक्टेयर यानी करीब 3337 वर्गफीट है। इस गाटे में कई सहखातेदारों के नाम दर्ज बताए जा रहे हैं।

इनमें अमरजीत सिंह, कमलराज सिंह, गयाबख्श डी राजपूत, दलजीत सिंह, पृथ्वीराज सिंह, राजबक्श सिंह, रामजीत सिंह, श्यामजीत सिंह, सावित्री देवी और सर्वजीत सिंह के नाम शामिल बताए गए हैं।

सबसे अहम बात यह है कि उपलब्ध खतौनी विवरण के मुताबिक विक्रमाजीत सिंह के नाम इस गाटे में केवल 0.0009 हेक्टेयर यानी करीब 97 वर्गफीट जमीन दर्ज है।

यहीं से पूरे मामले में एक नया सवाल खड़ा हो जाता है—अगर हिस्सेदारी महज करीब 97 वर्गफीट है तो क्या कल्टीवेटर लगे ट्रैक्टर से उस हिस्से में जुताई संभव थी?

स्थानीय लोगों का दावा है कि घटना के दौरान बनाए गए वीडियो में ट्रैक्टर को इससे कहीं बड़े क्षेत्र में चलते हुए देखा जा सकता है। पीड़ित परिवार का दावा है कि जबरन विवाद पैदा करने के लिए रौशन सिंह द्वारा ट्रैक्टर से उस्मान अली के घर के सामने स्थित रास्ते को भी जोता जा रहा था।

वीडियो में महिलाओं से कहासुनी से लेकर मारपीट और ट्रैक्टर चढ़ाने तक के दृश्य होने का दावा

मृतक पक्ष का कहना है कि घटना के समय उस्मान अली के परिवार की ओर से मौके पर मुख्य रूप से महिलाएं और युवतियां मौजूद थीं।

परिजनों के अनुसार, महिलाओं ने ही ट्रैक्टर से रास्ता जोते जाने का विरोध किया था। इसी दौरान विवाद बढ़ा और मारपीट शुरू हो गई।

घटना के वीडियो को लेकर मृतक पक्ष का दावा है कि वीडियो की शुरुआत में महिलाओं के हाथों में कोई लाठी-डंडा दिखाई नहीं देता, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से कुछ युवक सिर पर भगवा गमछा बांधे और लाठी-डंडों के साथ नजर आते हैं। कुछ युवकों ने अपने चेहरे पर रुमाल भी बंधा नज़र आ रहा है। जो इस बात की तरफ इशारा करता है कि विपक्षियों द्वारा सुनियोजित तरीके से पूरी तैयारी के साथ घटना को अंजाम दिया गया है।

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परिजनों का आरोप है कि इन्हीं युवकों ने मारपीट की शुरुआत की और निहत्थी महिलाओं पर लाठी से हमला कर उन्हें जमीन पर गिरा दिया। महिलाओं को पिटता देखकर परिवार की अन्य महिलाएं और युवतियां उन्हें बचाने के लिए आगे आईं।

इसके बाद 70 वर्षीय शमशेर अली समेत परिवार के दो तीन अन्य बुजुर्ग लोग भी मौके पर पहुंचे।

मृतक पक्ष का आरोप है कि इसी दौरान रोशन सिंह उर्फ शिव सिंह ट्रैक्टर लेकर आया और शमशेर अली समेत कई लोगों को कुचल दिया। घटना में गंभीर रूप से घायल शमशेर अली की बाद में मौत हो गई।

तहरीर के दावे और वीडियो फुटेज में विरोधाभास 

मामले में सीमा सिंह की ओर से दी गई तहरीर में दावा किया गया है कि 16 अगस्त को रोशन सिंह उर्फ शिव सिंह अपनी बाग की जमीन गाटा संख्या-402 की जुताई कर रहा था। तहरीर के मुताबिक, इसी दौरान विपक्षी पक्ष के लोगों ने रोशन सिंह पर लोहे की सरिया, लाठी-डंडे, ईंट-गुम्मा और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। तहरीर में यह भी कहा गया है कि जान बचाने के लिए रोशन सिंह ट्रैक्टर छोड़कर भाग गया और उसके नियंत्रण से बाहर हुआ ट्रैक्टर पानी के गड्ढे में जाकर पलट गया, जिससे कुछ लोगों को चोटें आईं।

ड्राइवर सीट पर कौन था? जांच के लिए अहम सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यह है कि यदि तहरीर में किए गए दावे के मुताबिक रोशन सिंह ट्रैक्टर छोड़कर भाग चुका था और ट्रैक्टर उसके नियंत्रण से बाहर होकर पानी के गड्ढे में चला गया था, तो वीडियो में शमशेर अली और अन्य लोगों को ट्रैक्टर की चपेट में लिए जाने के समय ड्राइवर सीट पर दिखाई दे रहा युवक कौन था?

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि तहरीर में जानलेवा हमले के बाद ट्रैक्टर के अनियंत्रित होकर गड्ढे में जाने की बात कही गई है, जबकि वीडियो फुटेज में शुरुआती मारपीट के समय ट्रैक्टर को घटनास्थल से दूर उस्मान अली के घर के पास देखा जा सकता है। मारपीट शुरू होने के बाद ट्रैक्टर पीछे से आता और ड्राइवर सीट पर एक युवक को बैठे हुए देखा जा सकता है।

‘गुलशन को फोन करो’ वाली आवाज ने बढ़ाए सवाल

घटना के वीडियो को लेकर मृतक पक्ष ने एक और महत्वपूर्ण दावा किया है।

परिजनों के मुताबिक आरोपियों की तरफ से वायरल किए गए वीडियो में रोशन सिंह के घर की छत की तरफ से एक महिला की आवाज सुनाई देती है, जिसमें कथित तौर पर कहा जाता है—“चाची से कह दो जल्दी से फोन करे गुलशन लगे।”

इसके बाद ही सिर पर भगवा गमछा बांधे और लाठी-डंडों से लैस पांच-छह दर्जन लोग मौके पर पहुंच जाते हैं, जिनमें से अधिकतर ने रुमाल से अपना चेहरा छिपाया हुआ था।

मृतक पक्ष का आरोप है कि ये लोग पहले से आसपास छिपे हुए थे और फोन पर इशारा मिलने के बाद मौके पर पहुंचे तथा महिलाओं और युवतियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। जिसके बाद पूरा इलाका महिलाओं और लड़कियों की चीखों से गूंज उठा।

यदि वीडियो की स्वतंत्र जांच में घटनाक्रम और आवाज की पुष्टि होती है तो यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु हो सकता है कि जब तहरीर में मौके पर गुलशन के साथ भी मारपीट का दावा किया गया है तो महिला ने गुलशन के पास फोन करने की बात क्यों कही? पूरी घटना के दौरान छत पर दिख रही इस महिला की क्या भूमिका थी।

अब मृतक पक्ष पर ही बलवे की FIR, पुलिस की कार्रवाई पर बड़ा सवाल

पूरे गुमान की घटना के बाद पुलिस ने पहले मृतक शमशेर अली पक्ष की शिकायत पर विक्रमाजीत सिंह पक्ष के 9 नामजद समेत अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा।

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लेकिन घटना के पांच दिन बाद मामला उस समय फिर गरमा गया जब स्थानीय भाजपा विधायक दिनेश रावत और भाजपा कार्यकर्ताओं के आरोपी पक्ष के घर पहुंचने की बात सामने आई।

मृतक पक्ष का आरोप है कि दबंगों के हमले के दौरान उनके परिवार को बचाने आए दो हिंदुओं शंकरलाल व राजेन्द्र कुमार के भी घायल होने के बावजूद घटना को हिंदू-मुस्लिम विवाद का रंग देने का प्रयास किया गया और आरोपी पक्ष को पीड़ित बताते हुए उनके द्वारा की गई बर्बरता को आत्मरक्षा में कार्रवाई किए जाने की बात कही गई।

इसके बाद करणी सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा आरोपी विक्रमाजीत सिंह की पत्नी सीमा सिंह को लेकर सुबेहा थाने पहुंचने और मृतक पक्ष के 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग करने की बात सामने आई।

मृतक पक्ष का आरोप है कि इसी दबाव के बाद पुलिस ने 23 अगस्त को उनके परिवार की युवतियों, बीच बचाव कराने वाले राजेंद्र कुमार समेत 15 नामजद लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।

यहीं से पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

क्रॉस FIR में क्या कहा गया?

सीमा सिंह की ओर से दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि 16 अगस्त को सुबह करीब 10 बजे उनका बेटा रोशन सिंह उर्फ शिव सिंह गाटा संख्या 402 में ट्रैक्टर से जुताई कर रहा था।

तहरीर के मुताबिक इसी दौरान अजमत अली, मो. रियाज, सलामुद्दीन, मो. हुसैन उर्फ नजरू, महमद अली उर्फ बबऊ, मुस्ताक अली, गफ्फार अली समेत 15 नामजद और कुछ अज्ञात लोगों ने एक राय होकर रोशन सिंह पर लोहे की सरिया, लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर और धारदार हथियारों से हमला किया।

तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया कि रोशन सिंह की चीख सुनकर सूरज सिंह, गुलशन सिंह और मोहित सिंह समेत अन्य लोग बचाने पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई।

सीमा सिंह ने यह भी दावा किया कि हमला होने के बाद रोशन सिंह अपनी जान बचाने के लिए ट्रैक्टर छोड़कर भागा और ट्रैक्टर नियंत्रण से बाहर होकर पानी के गड्ढे में चला गया, जिससे कुछ लोगों को चोटें आईं।

इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होनी बाकी है।

जमीन विवाद की पुरानी कहानी भी सामने आई

मृतक पक्ष का कहना है कि यह विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ था।

परिजनों के मुताबिक आरोपी विक्रमाजीत सिंह और उनके लड़के अपनी दबंगई के दम पर गाटा संख्या 402 से सटी उनकी पुश्तैनी जमीन गाटा संख्या 403 पर कब्ज़े का प्रयास कर रहे थे। विवाद के चलते हैदरगढ़ तहसील में धारा 24 का वाद दायर कर जमीन का सीमांकन भी कराया गया था।

परिवार का दावा है कि 30 अप्रैल 2026 को नायब तहसीलदार और कानूनगो की मौजूदगी में जमीन की पैमाइश की कार्रवाई हुई थी। इसके बावजूद विपक्षी आए दिन विवाद खड़ा कर रहे थे।

परिजनों के अनुसार, इसी के चलते मामला पुलिस तक पहुंचा और दोनों पक्षों के बीच सुबेहा थाने में कई बार पंचायत हुई।

17 जुलाई 2026 को दोनों पक्षों के बीच हुए कथित समझौते में यह तय होने की बात कही जा रही है कि एक सप्ताह तक अजमत अली पक्ष गाटा संख्या 403 पर जुताई-बुवाई नहीं करेगा और यदि विक्रमाजीत सिंह पक्ष अदालत से कोई आदेश लेकर आता है तो उसका पालन किया जाएगा।

मृतक पक्ष का आरोप है कि निर्धारित अवधि के बाद भी विपक्षी कोई न्यायिक आदेश हासिल नहीं कर सके और अंततः दबंगई के जरिए जमीन पर कब्जे का प्रयास किया गया।

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पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल—निष्पक्ष जांच या दबाव में कार्रवाई?

पूरे गुमान की घटना में अब दो FIR सामने आने के बाद पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी की नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की भी है।

पहले एक बुजुर्ग की मौत हुई। परिवार की महिलाओं और युवतियों के साथ मारपीट के आरोप लगे। घटना का वीडियो सामने आने का दावा किया गया। जमीन के अभिलेखों को लेकर सवाल उठे और अब उसी मामले में मृतक पक्ष के लोगों पर भी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो गया।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि—

  • पुलिस ने क्रॉस FIR दर्ज करने से पहले वीडियो साक्ष्यों की जांच की या नहीं?
  • गाटा संख्या 402 में आरोपी पक्ष की वास्तविक हिस्सेदारी और मौके पर ट्रैक्टर से की गई जुताई के क्षेत्रफल का मिलान किया गया या नहीं?
  • 97 वर्गफीट हिस्सेदारी वाले व्यक्ति द्वारा बड़े क्षेत्र में ट्रैक्टर चलाने के दावे की राजस्व रिकॉर्ड से जांच हुई या नहीं?
  • घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों की भूमिका वीडियो के आधार पर तय की जाएगी या केवल तहरीर के आधार पर?
  • क्या घायलों और युवतियों को भी उसी घटना के आरोपी के रूप में शामिल करने से पहले उनके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की गई?
  • और सबसे अहम—क्या पुलिस किसी राजनीतिक या जातीय संगठन के दबाव में कार्रवाई करेगी या कानून में दी गई व्यवस्था के अनुसार?

इन सवालों का जवाब पुलिस की विवेचना और जांच के बाद ही सामने आएगा।

‘पीड़ित कौन और आरोपी कौन?’ अब जांच पर टिकी निगाहें

पूरे गुमान का मामला अब महज जमीन विवाद नहीं रह गया है। एक तरफ 70 वर्षीय शमशेर अली की मौत है, दूसरी तरफ मृतक पक्ष के खिलाफ दर्ज हुई क्रॉस FIR है।

एक तरफ घटना के कई वीडियो होने का दावा है, दूसरी तरफ क्रॉस एफआईआर के लिए दी गई तहरीर में अलग घटनाक्रम बताया गया है।

ऐसे में अब पुलिस के सामने सबसे जरूरी कसौटी यही है कि मामले में कार्रवाई भाजपा विधायक या करणी सेना के दबाव पर नहीं, बल्कि वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, राजस्व अभिलेख, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हो।

क्योंकि अगर जांच निष्पक्ष हुई तो यह साफ हो सकेगा कि 16 अगस्त को पूरे गुमान में वास्तव में घटनाक्रम किस क्रम में हुआ, किसने पहले हमला किया, ट्रैक्टर किस जमीन पर चला और शमशेर अली की मौत के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।

फिलहाल मृतक पक्ष पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहा है और आरोप लगा रहा है कि राजनीतिक दबाव में पीड़ित परिवार को ही आरोपी बनाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर पुलिस का पक्ष है कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में पुलिस वीडियो और राजस्व अभिलेखों समेत सभी साक्ष्यों को कितना महत्व देती है और क्या कार्रवाई वास्तव में निष्पक्ष तरीके से होती है।

रिपोर्ट – कामरान अल्वी 

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Kamran Alvi
Author: Kamran Alvi

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