बाराबंकी के निंदूरा विकासखंड में उमरा और शाहपुर बक्सौलिया की ग्राम चौपाल में अधिकांश विभागों के अधिकारी नदारद रहे।
ग्रामीणों ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 07 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के निंदूरा विकासखंड में ग्रामीणों की समस्याओं के मौके पर समाधान के लिए आयोजित की जा रही ग्राम चौपाल व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। शुक्रवार को उमरा और शाहपुर बक्सौलिया ग्राम पंचायतों में आयोजित चौपाल में अधिकांश विभागों के अधिकारी और कर्मचारी नदारद रहे। ऐसे में ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे तो उन्हें सुनने और समाधान करने के लिए संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारी ही मौजूद नहीं थे।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब ग्राम चौपाल में जरूरी विभागों के अधिकारी ही नहीं पहुंचेंगे तो सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य कैसे पूरा होगा। दोनों स्थानों पर हुई चौपाल में विभागीय अधिकारियों की गैरमौजूदगी और कम संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी ने प्रशासनिक तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए।
उमरा में 12 विभागों के अधिकारी नहीं पहुंचे
उमरा ग्राम पंचायत में आयोजित ग्राम चौपाल में ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग से जुड़े केवल दो कर्मचारी ही मौजूद रहे। ग्रामीणों के अनुसार राजस्व, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, आंगनबाड़ी, पशुपालन, विद्युत, जल निगम, जल जीवन मिशन, सिंचाई, खाद्य एवं पुलिस विभाग से कोई संबंधित अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
चौपाल के लिए पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण यहां भी ग्रामीणों की संख्या बेहद कम रही। बताया गया कि करीब 12 से 13 ग्रामीण ही चौपाल में पहुंचे। इस दौरान परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ने से संबंधित केवल एक प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ।
चौपाल में पंचायत सचिव राजेंद्र कुमार विकल और एडीओ कोऑपरेटिव प्रेम प्रकाश अग्निहोत्री मौजूद रहे। ग्रामीणों का कहना है कि औपचारिकता पूरी करने के बाद दोनों अधिकारी भी वहां से चले गए।
शाहपुर बक्सौलिया में भी चौपाल का यही हाल
शाहपुर बक्सौलिया में आयोजित ग्राम चौपाल में भी स्थिति अलग नहीं रही। यहां पंचायत सचिव शैलेश कुमार और जेई एमआई अनुराग कुमार के अलावा अन्य विभागों के जिम्मेदार अधिकारी नजर नहीं आए।
इस चौपाल में ग्रामीणों की ओर से परिवार रजिस्टर की नकल और खराब हैंडपंप की मरम्मत से संबंधित दो प्रार्थना पत्र दिए गए।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब स्वास्थ्य, बिजली, राजस्व, कृषि, पशुपालन और अन्य विभागों से जुड़े अधिकारी चौपाल में मौजूद ही नहीं होंगे तो ग्रामीण अपनी समस्याएं किसके सामने रखें और उनका मौके पर निस्तारण कैसे हो?

सरकार की मंशा पर सवाल, अधिकारी नदारद तो चौपाल का क्या मतलब?
ग्राम चौपाल का उद्देश्य ग्रामीणों को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में समस्याओं का समाधान कराना है।
लेकिन निंदूरा विकासखंड में शुक्रवार को आयोजित चौपालों में विभागीय अधिकारियों की अनुपस्थिति ने इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि न तो चौपाल के लिए पर्याप्त प्रचार किया गया और न ही संबंधित विभागों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने को लेकर गंभीरता दिखाई गई।
ग्रामीण बोले- अधिकारी ही नहीं आए तो समस्या कौन सुनेगा?
उमरा निवासी रामकिशोर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर चौपाल में आएं और संबंधित अधिकारी ही मौजूद न हों तो ऐसी चौपाल का क्या फायदा है। ग्रामीणों के अनुसार इससे उन्हें ऐसा महसूस होता है कि चौपाल केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
वहीं शाहपुर बक्सौलिया की एक महिला ने खराब हैंडपंप की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि वह लंबे समय से शिकायत कर रही हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। चौपाल में भी संबंधित विभाग का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ग्राम चौपाल के लिए संबंधित विभागों को पहले से सूचना और निर्देश दिए गए थे, तो अधिकारियों की अनुपस्थिति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि ग्राम चौपाल से अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और अगली चौपाल में सभी संबंधित विभागों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम चौपाल तभी सार्थक होगी, जब इसमें केवल उपस्थिति दर्ज कराने के बजाय मौके पर समस्याओं की सुनवाई और उनका वास्तविक समाधान भी कराया जाए।
अब सवाल यह है कि निंदूरा विकासखंड में ग्राम चौपाल की इस स्थिति पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और अगली चौपाल में क्या सभी विभागों के अधिकारी ग्रामीणों के बीच पहुंचते हैं?
रिपोर्ट – ललित राजवंशी












