Barabanki News: बाराबंकी के सुरसंडा में हजरत मखदूम शाह अब्दुल करीम शाह की दरगाह को लेकर विवाद गहराया।
मजार के नाम पर कथित वसूली और जमीन पर कब्जे के आरोपों की डीएम से जांच की मांग।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 07 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के मसौली थाना क्षेत्र स्थित ग्राम सुरसंडा की प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम शाह अब्दुल करीम शाह की मजार को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। दरगाह की जमीन पर कथित कब्जे की कोशिश, मजार के नाम पर कथित तौर पर रसीदें जारी कर धन वसूली और मुतवल्ली के अधिकार को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर पूरे प्रकरण की जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत में विशेष रूप से मुज़ौर आफताब समेत कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, आरोपित पक्ष का पक्ष अभी सामने नहीं आया है और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हुई है।
मजार के नाम पर कथित रसीदें जारी कर वसूली का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मुज़ौर आफताब और उनके साथ जुड़े कुछ लोग खुद को दरगाह से संबंधित बताते हुए मजार के नाम पर लोगों से कथित रूप से धनराशि वसूल रहे हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस उद्देश्य से कथित रसीदें भी छपवाई गई हैं।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन को ऐसी कथित रसीदें उपलब्ध होने का दावा करते हुए उनकी जांच कराने की मांग की है। आरोप है कि संबंधित लोगों के पास मुतवल्ली होने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज अथवा न्यायालय का आदेश नहीं है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि यदि दरगाह की देखरेख के लिए पहले से कमेटी मौजूद है तो फिर मजार के नाम पर अलग से रसीद जारी कर धनराशि किस अधिकार के तहत ली जा रही है।

वक्फ संख्या 127 से जुड़ी कमेटी की व्यवस्था का दावा
शिकायतकर्ता और ग्रामीणों का कहना है कि दरगाह की देखरेख वक्फ संख्या 127 से संबंधित कमेटी द्वारा की जाती है। आरोप लगाया गया है कि इसके बावजूद कुछ लोग कथित रूप से कमेटी की व्यवस्था को दरकिनार कर मजार के नाम पर अलग-अलग रसीदें जारी कर रहे हैं।
शिकायत में प्रशासन से वक्फ से संबंधित अभिलेखों, कमेटी की वैधता और मजार की देखरेख से जुड़े अधिकारों की जांच कराने की मांग की गई है।
झाड़-फूंक और अंधविश्वास के नाम पर भी पैसे लेने का आरोप
शिकायतकर्ता ने मजार पर आने वाले लोगों से कथित तौर पर झाड़-फूंक और अंधविश्वास के नाम पर धनराशि लेने का भी आरोप लगाया है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

दरगाह की जमीन पर कब्जे की कोशिश के भी आरोप
मामला केवल कथित वसूली तक सीमित नहीं है। शिकायत में दरगाह की देखरेख से संबंधित जमीन पर कथित कब्जे की कोशिश के भी आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता का कहना है कि दरगाह की जमीन पर खेती करने वाले बटाईदारों पर भी कथित रूप से दबाव बनाया जाता है। आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा बटाईदारों से उपज अथवा उससे प्राप्त होने वाली रकम को लेकर दबाव डाला गया।
विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी दिए जाने के आरोप भी शिकायत में लगाए गए हैं।
आफताब को लेकर शिकायत में क्या कहा गया?
शिकायत में मुज़ौर आफताब को लेकर कहा गया है कि वह पहले मोटरसाइकिल मरम्मत का काम करता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह काम छोड़कर मजार से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय बताया जा रहा है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी दौरान मजार के नाम पर कथित रूप से रसीदें जारी कर लोगों से रकम लिए जाने का सिलसिला शुरू हुआ।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए प्रशासन से संबंधित दस्तावेजों और रसीदों की जांच कराने की मांग की गई है।
डीएम से अभिलेखों और मुतवल्ली के अधिकार की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाए। इसमें मुख्य रूप से—
- दरगाह की जमीन के राजस्व अभिलेखों की जांच
- वक्फ संख्या 127 से संबंधित दस्तावेजों की जांच
- दरगाह की कमेटी की वैधता की जांच
- मुतवल्ली के अधिकार से जुड़े दस्तावेजों की जांच
- मजार के नाम पर जारी कथित रसीदों की जांच
- कथित तौर पर वसूली गई रकम की जांच
- जमीन पर खेती करने वाले बटाईदारों से जुड़े विवाद की जांच
शामिल है।
शिकायतकर्ता ने आरोप सही पाए जाने की स्थिति में संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है।
आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आना बाकी
इस पूरे मामले में मुज़ौर आफताब और अन्य आरोपित पक्ष का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोपों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित रसीदें वैध थीं या नहीं, मजार के नाम पर धनराशि लेने का अधिकार किसके पास था और दरगाह की जमीन तथा उसकी देखरेख को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है।
अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
दरगाह की जमीन, मुतवल्ली के अधिकार और मजार के नाम पर कथित वसूली को लेकर उठे सवालों के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो गई है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ता को उम्मीद है कि प्रशासन अभिलेखों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाएगा।
फिलहाल इस विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि मजार की व्यवस्था और दरगाह की जमीन पर वास्तविक अधिकार किसका है और मजार के नाम पर कथित तौर पर जारी की गई रसीदें आखिर वैध हैं या नहीं।
रिपोर्ट – आसिफ़ हुसैन












