Barabanki News:
लखनऊ-बहराइच हाईवे पर 40 साल पुराने संजय सेतु की मरम्मत की तैयारी शुरू। एनएचएआई ने रूट डायवर्जन के लिए शासन से मंजूरी मांगी, वैकल्पिक मार्गों की सूची भी जारी।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 02 फरवरी 2026
नेपाल और उत्तर प्रदेश के कई जिलों को जोड़ने वाले लखनऊ-गोंडा हाईवे पर स्थित संजय सेतु की मरम्मत को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने तैयारियां तेज कर दी है। सोमवार को मशीनों के साथ पहुंचे विभागीय अधिकारी और कर्मचारी पुल की तकनीकी जांच में जुटे रहे। हालांकि पुल पर यातयात को पूरी तरह बंद करने और रूट डायवर्जन लागू करने के लिए शासन से अभी तक अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है।
जानकारी के अनुसार लखनऊ-गोंडा हाईवे पर स्थित संजय सेतु लगभग 40 वर्ष पुराना है। भारी वाहनों के लगातार दबाव के चलते पुल पर आये दिन गड्ढे हो जाते हैं और जॉइंटो में दरारे पड़ जाती है। हालांकि इन्हें अस्थायी रूप से ठीक किया जाता रहा है, लेकिन पुल काफी पुराना होने के कारण यह समस्या बार-बार सामने आ रही है।

इसी को देखते हुए एनएचएआई ने पूरे पुल की व्यापक मरम्मत की योजना बनाई है। विभाग द्वारा 10 फरवरी से लगभग दो माह तक पुल पर मरम्मत कार्य के लिए रूट डायवर्जन लागू करने संबंधी पत्र एडीजी ट्रैफिक को भेजा गया है। हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी तक शासन की स्वीकृति नहीं मिली है।
पुल की तकनीकी जांच शुरू
सोमवार को विभागीय टीम ने संजय सेतु पर पहुंचकर मशीनों के माध्यम से पुल की जांच शुरू कर दी। इस दौरान जेई सद्दाम ने बताया कि शासन से अनुमति मिलते ही मरम्मत कार्य तत्काल शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल पुल की तकनीकी जांच की जा रही है ताकि मरम्मत की विस्तृत योजना तैयार की जा सके।

रूट डायवर्जन न होने पर यात्रियों को होगी भारी परेशानी
वही, इस पुल से आवागमन पूरी तरह बंद होने की स्थिति में लखनऊ, बहराइच, गोंडा सहित आसपास के जिलों से गुजरने वाले यात्रियों को सैकड़ों किलोमीटर का अतिरिक्त सफ़र तय करना पड़ सकता है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
प्रस्तावित वैकल्पिक मार्ग (Alternate Routes)
- बहराइच से लखनऊ : चहलारीघाट के रास्ते (लगभग 151 किमी)
- श्रावस्ती से लखनऊ : बहराइच–चहलारीघाट मार्ग से (लगभग 197 किमी)
- गोंडा से लखनऊ : अयोध्या मार्ग से (लगभग 186 किमी)
- गोंडा से लखनऊ : परसपुर–रोनाही मार्ग से (लगभग 188 किमी)
- बलरामपुर से लखनऊ : गोंडा–परसपुर–रोनाही मार्ग से (लगभग 230 किमी)
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों का कहना है कि यदि मरम्मत के दौरान इन वैकल्पिक मार्गों (डायवर्जन) को समय रहते लागू कर दिया जाए और सूचना की उचित व्यवस्था की जाए, तो यात्रियों को बड़ी समस्या से बचाया जा सकता है। अब सबकी नज़र शासन की मंजूरी पर टिकी हुई है, जिसके बाद मरम्मत कार्य और रूट डायवर्जन को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
रिपोर्ट – निरंकार त्रिवेदी















