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Barabanki News: मदरसा VRS घोटाला उजागर, नियमावली में प्रावधान न होने के बावजूद बांटे गए वीआरएस; नई भर्तियों के लिए रची गई साजिश – अब लटकी कार्रवाई की तलवार

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Barabanki Madarsa VRS Scam: मदरसा विनियमावली में प्रावधान न होने के बावजूद शिक्षकों को वीआरएस देकर नई भर्तियाँ की गईं। एनएचआरसी ने लिया संज्ञान, विभाग में मचा हड़कंप।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश।

जनपद बाराबंकी सहित प्रदेश के राज्यानुदानित मदरसों में एक बड़े प्रशासनिक और वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। मदरसा विनियमावली में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) का कोई प्रावधान न होने के बावजूद कई राज्यानुदानित मदरसों में शिक्षकों और कर्मचारियों को नियमों के विरुद्ध वीआरएस दे दिया गया। आरोप है कि यह पूरा खेल वीआरएस के बाद रिक्त हुए पदों पर मनमानी और भ्रष्टाचारपूर्ण नियुक्तियों के लिए रचा गया।

 

नियमों को ताक पर रखकर बांटे गए वीआरएस

सूत्रो के अनुसार मदरसा भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा या पारदर्शी चयन प्रणाली नहीं होती। इसी का फायदा उठाते हुए मदरसा प्रबंधन द्वारा अपने रिश्तेदारों और चहेतो को शिक्षक पदों पर नियुक्त करने के उद्देश्य से पुराने शिक्षकों को अवैध रूप से वीआरएस दिया गया, फिर रिक्त सीटों पर नई भर्तियां कर दी गई।

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निदेशक के पत्र से मचा हड़कंप

पूरा मामला तब उजागर हुआ जब बीते माह अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक अंकित कुमार अग्रवाल ने मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार और प्रदेश के सभी जिलों के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र भेजकर नियमों के विरुद्ध दिए गए वीआरएस और स्वीकृत पेंशन पर सवाल खड़े किए। पत्र के माध्यम से सभी जनपदों से विस्तृत जानकारी तलब की गई, जिसके बाद पूरे मदरसा सिस्टम में खलबली मच गई।

 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला

मामला तब और गंभीर हो गया जब मदरसा सुधार आंदोलन के संयोजक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद तलहा अंसारी ने इस पूरे घोटाले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, भारत सरकार से कर दी। आयोग ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक को नोटिस जारी कर दिया, जिससे विभाग के हड़कंप मच गया है।

 

बाराबंकी का नाम भी घोटाले में शामिल

मदरसा वीआरएस घोटाले में बाराबंकी जनपद भी पीछे नहीं रहा। जनपद में बड़े पैमाने पर नियमों के विरुद्ध वीआरएस दिए जाने की बात सामने आई है। जिन प्रमुख नामों पर सवाल उठ रहे है उनमें—

  • मदरसा मुईनुल इस्लाम, सुढ़ियामऊ के क्लर्क मोहम्मद अनवार अंसारी
  • मदरसा मस्बाहुल उलूम, देवा के प्रधानाचार्य मो. फहीम
  • मदरसा मस्बाहुल उलूम, देवा के शिक्षक जलालुद्दीन
  • मदरसा जामिया मदीनतुल उलूम, रसौली के कार्यवाहक प्रधानाचार्य मोहम्मद फारूक
  • मदरसा जामिया मदीनतुल उलूम, रसौली के शिक्षक मोहम्मद सईद
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इन सभी को नियमों के विरुद्ध वीआरएस देकर पेंशन स्वीकृत की गई और उनके रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां भी कर दी गई।

 

वित्तीय अनियमितता और विभागीय लापरवाही

विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला न केवल गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है, बल्कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। मदरसा विनियमावली 2016 के अंतर्गत संचालित होने वाले संस्थानों में ऐसे नियम का लागू होना, जिसका कही कोई उल्लेख ही नहीं है, विभागीय लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है।

 

अब पूरे सिस्टम पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मदरसा विनियमावली 2016 में वीआरएस का कोई प्रावधान नहीं है, तो यह नियम मदरसा प्रबंधन और विभाग को कहा से मिला?
फिलहाल पूरा मदरसा सिस्टम और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग जांच के घेरे में है। सूत्रो का कहना है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस मामले में कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है, जिसमें कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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रिपोर्ट – मंसूफ अहमद

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Author: Kamran Alvi

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