Lucknow: उत्तर प्रदेश के DGP राजीव कृष्ण ने अपराध समीक्षा बैठक में बड़ा एक्शन लिया है।
DGP ने 6 थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर किया और 2 CO ट्रैफिक के खिलाफ जांच के आदेश दिए।
बैठक में सड़क दुर्घटनाएं, त्योहार सुरक्षा और जन शिकायतों पर सख्त निर्देश जारी किए गए।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 09 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय में राजीव कृष्ण ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जोनल ADG, पुलिस आयुक्त, IG/DIG और SSP/SP के साथ उच्चस्तरीय अपराध समीक्षा बैठक की।
बैठक में कानून-व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, जन शिकायत निस्तारण, मीडिया समन्वय और आधुनिक तकनीकी योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
6 थाना प्रभारी लाइन हाजिर, कई जिलों में कार्रवाई
समीक्षा के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि को गंभीरता से लेते हुए DGP ने 6 थाना प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने के निर्देश दिए।
इनमें शामिल अधिकारी—
- दीपक कुमार (चोलापुर, वाराणसी)
- जितेंद्र सिंह (कैम्पियरगंज, गोरखपुर)
- विष्णुकांत तिवारी (छिबरामऊ, कन्नौज)
- जगदीश प्रसाद शुक्ला (रामसनेही घाट, बाराबंकी)
- धीरज यादव (जौन, अलीगढ़)
- उदय प्रताप सिंह (सिकरारा, जौनपुर)


2 CO ट्रैफिक पर जांच के आदेश
DGP ने बाराबंकी और जौनपुर के ट्रैफिक अधिकारियों पर भी सख्त रुख अपनाया।
- बाराबंकी के CO ट्रैफिक आलोक कुमार पाठक
- जौनपुर के CO ट्रैफिक गिरेंद्र कुमार सिंह
दोनों अधिकारियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
‘Zero Fatality District’ योजना पर खास फोकस
बैठक में ‘Zero Fatality District’ योजना की समीक्षा की गई, जो 1 जनवरी 2026 से प्रदेश के 7 कमिश्नरेट और 68 जिलों के 487 संवेदनशील थानों में लागू है।
हालांकि योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए, लेकिन 46 थानों में दुर्घटनाएं बढ़ने और 6 में अत्यधिक वृद्धि मिलने पर DGP ने सख्त कार्रवाई की।

जन शिकायत और मीडिया समन्वय पर विशेष निर्देश
DGP ने थाना और चौकी स्तर पर शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए।
साथ ही मीडिया को समय पर तथ्यात्मक और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराने के आदेश भी जारी किए गए, ताकि अफवाहों पर रोक लगाई जा सके।
ट्रैफिक और टेक्नोलॉजी योजनाओं की समीक्षा
बैठक में C-RTC (City Reducing Traffic Congestion) योजना की भी समीक्षा की गई, जो 20 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू है।
- पीक आवर्स में ट्रैफिक कम करने के लिए विशेष रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए।
- ई-साक्ष्य ऐप और यक्ष ऐप के प्रभावी उपयोग के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया।

अपराध जांच की समयसीमा तय
DGP ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत—
- सामान्य मामलों का निस्तारण 60 दिन में
- गंभीर अपराधों का निस्तारण 90 दिन में
पूरा करने के निर्देश दिए।
त्योहारों और बड़े आयोजनों को लेकर अलर्ट
आगामी त्योहारों और बड़े आयोजनों को देखते हुए DGP ने सभी जिलों को आयोजकों से समन्वय बनाकर सुरक्षा व्यवस्था समय से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
रिपोर्ट – नौमान माजिद













