Barabanki: बांसा शरीफ में सूफी संत सैय्यद अब्दुर्रज्जाक शाह की मजार पर 8 दिवसीय मेले में कुल शरीफ अकीदत के साथ सम्पन्न।
हजारों जायरीन पहुंचे, लंगर और शीरनी का वितरण।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 25 मार्च 2026
जिले के मसौली क्षेत्र स्थित बांसा शरीफ में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करते हुए सुप्रसिद्ध सूफी संत सैय्यद अब्दुर्रज्जाक शाह की मजार पर आयोजित 8 दिवसीय सालाना मेले में बुधवार को पूरे शान-ओ-शौकत और अकीदत के साथ कुल शरीफ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर लखनऊ के फिरंगी महल से आए उलेमा-ए-इकराम समेत देशभर से हजारों की संख्या में जायरीनों ने शिरकत कर अमन-चैन और तरक्की के लिए दुआएं मांगीं।

परंपरागत रीति-रिवाज के साथ हुआ कुल शरीफ का आयोजन
जियारत से शुरू हुआ कार्यक्रम
कुल शरीफ का आयोजन परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार 5 शव्वाल को किया गया।
सज्जादा नशीन सैय्यद उमर जिलानी के आवास पर नमाज-ए-असर के बाद सैय्यद साहब की टोपी, तस्बीह और कशकौल की जियारत दूर-दराज से आए जायरीनों को कराई गई।
इसके बाद नमाज-ए-मगरिब के पश्चात खानकाह रज्जाकिया में कारी अब्दुल रहीम द्वारा कुरान शरीफ की तिलावत के साथ कुल शरीफ का विधिवत आगाज हुआ।

शीरनी वितरण और लंगर में उमड़ा जनसैलाब
कुल शरीफ के बाद जायरीनों में शीरनी का वितरण किया गया।
साथ ही सज्जादा नशीन के आवास पर विशाल लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और एकता का संदेश दिया।
इस दौरान पूरे क्षेत्र में भाईचारे और सौहार्द का वातावरण देखने को मिला।

जायरीनों के लिए विशेष व्यवस्थाएं
मेला कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद रिजवान संजय ने बताया कि पूरे मेले में व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं।
गर्मी को देखते हुए जायरीनों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था (प्याऊ) की गई, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो।
उन्होंने कहा कि सभी सदस्य अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं।

देशभर से पहुंचे जायरीन, दिखी आस्था और एकता की मिसाल
बांसा शरीफ का यह सालाना मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि गंगा-जमुनी संस्कृति और भाईचारे का भी प्रतीक है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों लोगों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और भव्य बना दिया।
रिपोर्ट – नूर मोहम्मद
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