बाराबंकी के हैदरगढ़ ब्लॉक में परिवार रजिस्टर की नकल जारी करने को लेकर अधिवक्ता और पंचायत सचिव के बीच विवाद हो गया।
अधिवक्ताओं के विरोध के बाद सचिव ने परिवार रजिस्टर की नकल जारी की। पढ़ें पूरा मामला।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 08 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ विकास खंड कार्यालय में बुधवार को परिवार रजिस्टर की नकल जारी करने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। एक अधिवक्ता ने पंचायत सचिव पर बिना वजह ग्राम प्रधान की संस्तुति मांगने, आवेदन स्वीकार न करने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया। मामले की जानकारी मिलते ही तहसील के बड़ी संख्या में अधिवक्ता ब्लॉक परिसर पहुंच गए। बढ़ते विरोध के बीच पंचायत सचिव ने अंततः परिवार रजिस्टर की नकल जारी कर दी।
घटना के बाद ब्लॉक परिसर में काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं।
कई दिनों से परिवार रजिस्टर की नकल के लिए लगा रहे थे चक्कर
जानकारी के अनुसार रानीपुर ग्राम पंचायत निवासी अधिवक्ता अंबरीष यादव गांव निवासी राजितराम के परिवार रजिस्टर की नकल प्राप्त करने के लिए कई दिनों से विकास खंड कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे।
अधिवक्ता का आरोप है कि बुधवार को भी जब वह संबंधित पंचायत सचिव के पास पहुंचे तो उनसे ग्राम प्रधान की संस्तुति (सिफारिश) लाने के लिए कहा गया।
उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान से उनके संबंध अच्छे नहीं हैं, इसलिए उन्होंने क्षेत्र पंचायत सदस्य की संस्तुति के साथ आवेदन प्रस्तुत किया था। इसके बावजूद सचिव ने आवेदन स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
आवेदन फेंकने और अभद्रता का लगाया आरोप
अधिवक्ता अंबरीष यादव का आरोप है कि पंचायत सचिव ने उनका आवेदन उठाकर फेंक दिया और कहा कि जब तक ग्राम प्रधान की संस्तुति नहीं होगी, तब तक परिवार रजिस्टर की नकल जारी नहीं की जाएगी।
इस व्यवहार से आहत अधिवक्ता ने तत्काल तहसील के अन्य अधिवक्ताओं को मामले की जानकारी दी।
सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता विकास खंड कार्यालय पहुंच गए और पंचायत सचिव के रवैये पर नाराजगी जताते हुए विरोध शुरू कर दिया।
अधिवक्ताओं के विरोध के बाद जारी हुई परिवार रजिस्टर की नकल
ब्लॉक परिसर में अधिवक्ताओं की बढ़ती संख्या और विरोध को देखते हुए संबंधित पंचायत सचिव ने अपना रुख नरम किया।
इसके बाद अधिवक्ता को परिवार रजिस्टर की नकल तत्काल जारी कर दी गई, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
हालांकि घटना ने ब्लॉक कार्यालय की कार्यप्रणाली और दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
पंचायत सचिव ने आरोपों को बताया निराधार
मामले में पंचायत सचिव अखिलेश दुबे ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
उन्होंने बताया कि संबंधित प्रकरण में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया लंबित थी, जिसकी नियमानुसार जांच आवश्यक थी। जांच पूरी होने के बाद ही दस्तावेज जारी किया जाना था।
सचिव का आरोप है कि अधिवक्ता तत्काल नकल जारी कराने का दबाव बना रहे थे। उन्होंने अपने कुछ साथियों को बुलाकर कार्यालय में अनावश्यक दबाव बनाया, जिसके कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो किसी प्रकार की अभद्रता की गई और न ही आवेदन पत्र फेंका गया।
दोनों पक्षों के आरोपों के बाद चर्चा का विषय बना मामला
अधिवक्ता और पंचायत सचिव के बीच हुए इस विवाद के बाद ब्लॉक कार्यालय में दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कोई जांच या आगे की कार्रवाई करता है या नहीं।
परिवार रजिस्टर की नकल के नाम पर वसूली के आरोप, कई विकास खंडों में उठते रहे सवाल
जनपद बाराबंकी के विभिन्न विकास खंडों में तैनात पंचायत सचिवों की कार्यशैली को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि परिवार रजिस्टर की नकल, जन्म-मृत्यु से जुड़े प्रमाण पत्र और अन्य पंचायत संबंधी दस्तावेज जारी करने के नाम पर कई जगहों पर अनावश्यक आपत्तियां लगाई जाती हैं।
आरोप यह भी है कि बिना “सुविधा शुल्क” दिए आवेदकों को बार-बार ब्लॉक कार्यालय के चक्कर कटवाए जाते हैं, जबकि भुगतान करने वालों का काम अपेक्षाकृत जल्दी कर दिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है। ऐसे मामलों ने पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए हैं।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











