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Barabanki: जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल, मोतियाबिंद जांच मशीन खराब; मरीजों को निजी क्लीनिक भेजने का आरोप

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Barabanki: जिला अस्पताल में मोतियाबिंद जांच की ए-स्कैन मशीन खराब। 

जांच के नाम पर मरीजों को भेजा जा रहा निजी क्लीनिक।

CMS और CMO ने जांच के आदेश दिए।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 07 अप्रैल 2026

जनपद बाराबंकी का जिला सरकारी अस्पताल एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। ताज़ा मामला आंखों की जांच से जुड़ा है, जहां मोतियाबिंद (Cataract) के मरीजों के लिए आवश्यक आईओएल (IOL) पावर मापने वाली ए-स्कैन बायोमेट्री मशीन लंबे समय से खराब बताई जा रही है। इससे मरीजों को सरकारी सुविधा के बजाय निजी क्लीनिकों का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।

जांच के नाम पर मरीजों को बाहर भेजने का आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक स्थानीय पत्रकार अपनी पत्नी की आंखों की जांच कराने जिला अस्पताल पहुंचे। वहां तैनात चिकित्सक डॉ. संजय बाबू ने जांच के दौरान मोतियाबिंद की पुष्टि की और आगे की आवश्यक जांच अस्पताल के बाहर कराने की सलाह दी।

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बताया गया कि डॉक्टर ने एक निजी क्लीनिक का नाम भी सुझाया। इस पर सवाल उठाए जाने पर उन्होंने कहा कि अस्पताल में मशीन उपलब्ध है, लेकिन फिलहाल खराब है।

CMS से शिकायत के बाद बढ़ा विवाद

मामले को लेकर पत्रकार ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. जे.पी. मौर्य से शिकायत की। सीएमएस ने मशीन खराब होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि इसे जल्द ठीक कराने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।

हालांकि, शिकायत के बाद डॉक्टर और पत्रकार के बीच तीखी बहस भी हो गई। आरोप है कि डॉक्टर ने नाराजगी जताते हुए मरीज को अन्य संस्थानों—जैसे लखनऊ स्थित लोहिया संस्थान—में जांच कराने की बात कही। इस पर खर्च को लेकर विवाद और बढ़ गया।

मरीजों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

जिला अस्पताल में यह जांच सामान्यतः नि:शुल्क होनी चाहिए, लेकिन मशीन खराब होने के कारण मरीजों को निजी क्लीनिक में ₹300 से ₹500 तक खर्च करना पड़ रहा है। इससे गरीब और मजदूर वर्ग के मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

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स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों के बावजूद लापरवाही?

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकारी अस्पतालों में सभी मरीजों को बेहतर और नि:शुल्क इलाज मिलना चाहिए। इसके बावजूद ऐसी स्थिति सामने आना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

CMO ने दिए जांच के आदेश

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अवधेश कुमार यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही खराब मशीन को जल्द ठीक कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बड़ा सवाल—मशीन कब तक रहेगी खराब?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच मशीन लंबे समय से खराब थी, तो अब तक इसे ठीक क्यों नहीं कराया गया? क्या मरीजों को मजबूरन निजी क्लीनिकों की ओर धकेला जा रहा है?

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यह मामला न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को उजागर करता है, बल्कि सरकारी सिस्टम की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान

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Author: Kamran Alvi

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