बाराबंकी के एक निजी अस्पताल पर प्रसव ऑपरेशन के दौरान महिला के शरीर में कॉटन/गॉज छोड़ने का गंभीर आरोप लगा है।
यूरिन मार्ग से गॉज निकलने के बाद परिजनों ने CMO से शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 23 मई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक निजी अस्पताल पर प्रसव ऑपरेशन के दौरान महिला के शरीर में कॉटन/गॉज छोड़ देने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़िता के परिजनों ने इस मामले को चिकित्सीय लापरवाही बताते हुए स्वास्थ्य विभाग से लिखित शिकायत कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है। घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार नगर पंचायत रामनगर निवासी अजय पांडेय ने बताया कि उनकी पुत्री शालू पांडेय को 2 मार्च 2026 की देर रात प्रसव पीड़ा होने पर बाराबंकी शहर के धनोखर स्थित गुड़ मंडी इलाके में संचालित न्यू सहारा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 5 मार्च को अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए बच्ची का जन्म हुआ।

डिस्चार्ज के बाद लगातार दर्द से परेशान रही महिला
परिजनों का आरोप है कि 13 मार्च को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद से ही शालू पांडेय के पेट में लगातार तेज दर्द, सूजन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बनी रहीं। कई बार अस्पताल प्रबंधन से शिकायत करने के बावजूद सही कारण नहीं बताया गया।
पीड़िता के पिता के मुताबिक 19 मई को अचानक महिला के यूरिन मार्ग से एक बड़ा टुकड़ा बाहर निकला। यह देखकर परिवार घबरा गया और तुरंत महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने जांच और अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी।

जांच में बच्चेदानी में सूजन, बाहर निकला टुकड़ा निकला कॉटन/गॉज
जांच रिपोर्ट में बच्चेदानी में सूजन की पुष्टि हुई। वहीं बाहर निकले टुकड़े की जांच कराने पर उसके कॉटन/गॉज होने की बात सामने आई। परिजनों का आरोप है कि यह गॉज प्रसव ऑपरेशन के दौरान महिला के शरीर में ही छूट गया था।
पीड़िता के पिता अजय पांडेय ने इसे गंभीर चिकित्सीय लापरवाही बताते हुए अस्पताल प्रबंधन, डॉक्टरों और संबंधित स्टाफ के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कॉटन बाहर नहीं निकलता तो संक्रमण फैलने से महिला की जान भी जा सकती थी।
परिजनों ने सौंपे दस्तावेज और फोटो, स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग
परिजनों ने बताया कि उनके पास मामले से जुड़े मेडिकल दस्तावेज, जांच रिपोर्ट और बाहर निकले कथित कॉटन/गॉज के फोटोग्राफ भी मौजूद हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इस मामले में बाराबंकी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अवधेश कुमार यादव ने कहा कि शिकायत प्राप्त हुई है और जांच के लिए टीम गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में यदि लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद जिले में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मामलों में सख्त निगरानी और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि मरीजों की जान से खिलवाड़ न हो सके।
भीड़भाड़ वाले इलाके में संचालित अस्पतालों पर भी उठे सवाल
गौरतलब है कि न्यू सहारा हॉस्पिटल शहर के अति व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाके में स्थित है। यहां दिन के समय हर समय जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। चार पहिया वाहन तो दूर, साइकिल और मोटरसाइकिल सवारों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

ऐसे में मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में एंबुलेंस का अस्पताल तक समय पर पहुंच पाना बड़ी चुनौती बन जाता है। जिले के निवर्तमान जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए अभियान भी चलाया था। उन्होंने बैठक के दौरान सीएमओ डॉ. अवधेश कुमार यादव को भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बिना पार्किंग संचालित अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की सूची तैयार कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
हालांकि, जिलाधिकारी के तबादले के बाद यह अभियान ठंडे बस्ते में चला गया और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बिना पार्किंग संचालित अस्पतालों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्ट – निरंकार त्रिवेदी














