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बाराबंकी में सरकारी पेड़ों की अवैध कटान और बिक्री, अंबेडकर पार्क से 50 से ज्यादा पेड़ काटे जाने का आरोप; उच्चाधिकारियों से शिकायत

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बाराबंकी के सुबेहा नगर पंचायत स्थित अंबेडकर पार्क में 50 से अधिक पेड़ों की अवैध कटान और बिक्री का आरोप।

बिना अनुमति पेड़ काटे जाने पर वन विभाग ने शुरू की जांच, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 17 अप्रैल 2026

जनपद के सुबेहा नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित अंबेडकर पार्क की सरकारी भूमि पर पेड़ों की अवैध कटान और बिक्री का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया और नीलामी के दर्जनों पेड़ों को काटकर बेच दिया गया, जिससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।

बताया जा रहा है कि यह भूमि हाल ही में राजस्व प्रशासन द्वारा अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई थी, लेकिन इसके बाद भी संरक्षण के बजाय पेड़ों की कटाई कर दी गई।

50 से अधिक पेड़ों को काटने का आरोप

स्थानीय वार्ड निवासी शान मोहम्मद ने आरोप लगाया है कि पार्क में करीब 50 से अधिक पुराने पेड़—जिनमें आम, नीम, शीशम और गूलर शामिल थे—को बिना अनुमति काट दिया गया।

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उन्होंने इसे न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक बताया, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला बताया है।

पहले भी हो चुकी है ऐसी घटनाएं

शान मोहम्मद के अनुसार, यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी खलिहान की जमीन पर इसी तरह पेड़ों की कटान की गई थी, लेकिन उस समय भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने बताया कि इस बार मामले को लेकर वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों से मौखिक शिकायत की गई है और जल्द ही लिखित शिकायत भी दी जाएगी।

अधिशासी अधिकारी का विवादित बयान

जब इस मामले में नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (ईओ) से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने स्पष्ट जानकारी देने से बचते हुए कहा कि:

  • पेड़ नगर पंचायत की भूमि पर थे
  • कटान के लिए किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं थी
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हालांकि, यह बयान नियमों और प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े करता है।

वन विभाग ने शुरू की जांच

वन दरोगा अनुज सिंह ने पुष्टि की है कि पेड़ों की कटान के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। उन्होंने बताया कि:

  • मामले की जांच शुरू कर दी गई है
  • विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी

इस खुलासे के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर सवाल और गहराते जा रहे हैं।

पर्यावरण और प्रशासन दोनों पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि:

  • क्या सरकारी जमीन और हरित क्षेत्र सुरक्षित हैं?
  • बिना अनुमति और नीलामी पेड़ों की कटान कैसे संभव हुई?
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
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स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे मामलों को बढ़ावा मिलेगा।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Kamran Alvi

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