बाराबंकी के लाजपत नगर में निर्माण विवाद के बीच जान से मारने की धमकी देने का आरोप। पीड़ित ने यूपी-112 पुलिस के सामने धमकी और बार-बार शिकायत के बाद भी एफआईआर दर्ज न होने का दावा किया।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 09 अक्टूबर 2026
बाराबंकी में पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। नगर कोतवाली क्षेत्र के लाजपत नगर निवासी एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि अवैध निर्माण का विरोध करने पर उसे सिलेंडर से उड़ाने और कार से कुचलकर मार डालने की धमकी दी गई। पीड़ित का दावा है कि धमकी देने वाले लोग यूपी-112 पुलिस की मौजूदगी में भी नहीं रुके। इसके बावजूद कई बार शिकायत करने और एसडीएम नवाबगंज की ओर से पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद भी उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
पीड़ित ने पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है। मामला कथित निर्माण विवाद, न्यायालय के आदेश की अवहेलना और जान से मारने की धमकियों से जुड़ा है।
एसडीएम ने काम रोकने का दिया था आदेश
मामला नगर कोतवाली क्षेत्र के लाजपत नगर का है। यहां के निवासी गुरप्रीत सिंह पुत्र स्वर्गीय राजेन्द्र सिंह के मुताबिक, उन्होंने 19 अगस्त 2026 को सरदार जसबीर सिंह पुत्र स्वर्गीय तेजपाल सिंह, निवासी लाजपत नगर, के खिलाफ कथित अवैध निर्माण की शिकायत एसडीएम नवाबगंज गुंजिता अग्रवाल से की थी।
पीड़ित के अनुसार, शिकायत पर एसडीएम नवाबगंज ने 21 अगस्त 2026 को अग्रिम आदेश तक निर्माण कार्य रोकने और निगरानी रखने का आदेश नगर कोतवाली पुलिस को दिया था।
गुरप्रीत सिंह का आरोप है कि आदेश के बावजूद संबंधित पक्ष चोरी-छिपे निर्माण कार्य कराता रहा। इसी विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया।

5 अक्टूबर को बिल्डिंग में कैमरे लगाने का आरोप
पीड़ित की शिकायत के मुताबिक, 5 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 3 बजे सरदार जसबीर सिंह, उनके पुत्र सरबजीत सिंह उर्फ प्रिंस और इन्दरजीत सिंह ने कथित तौर पर विवादित बिल्डिंग में कैमरे लगाने शुरू कर दिए।
गुरप्रीत सिंह का कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो तीनों ने उनके साथ गाली-गलौज की और उन्हें दौड़ा लिया। जान बचाने के लिए वह अपने घर की पहली मंजिल पर भागे, लेकिन आरोप है कि संबंधित लोग घर की सीढ़ियों के अंदर तक पहुंच गए।
यूपी-112 पुलिस के सामने भी धमकी देने का आरोप
गुरप्रीत सिंह के मुताबिक, घटना के दौरान उन्होंने 5 अक्टूबर को दोपहर करीब 3:45 बजे डायल 112 पर फोन कर पुलिस से मदद मांगी, जिसकी इवेंट आईडी P05102615382 है।
पीड़ित का आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस के सामने भी संबंधित लोगों ने उन्हें सिलेंडर से उड़ाने और गाड़ी चढ़ाकर मार डालने की धमकी दी। उनका दावा है कि पुलिस ने विरोध किया, लेकिन आरोपी कथित तौर पर नहीं माने।
शिकायत के अनुसार, यूपी-112 पुलिस ने किसी तरह मौके पर काम रुकवाया और संबंधित पक्षों को अग्रिम आदेश तक निर्माण संबंधी गतिविधियां नहीं करने की हिदायत दी।

पुलिस के जाने के बाद दोबारा शुरू हो गया निर्माण कार्य
पीड़ित का कहना है कि पुलिस के मौके से जाने के बाद भी संबंधित पक्ष कथित रूप से निर्माण कार्य जारी रखे हुए हैं। उनका आरोप है कि बार-बार विरोध और शिकायत के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
गुरप्रीत सिंह ने शिकायत में यह भी कहा है कि धमकियों के कारण वह और उनका परिवार डरे हुए हैं। उन्हें आशंका है कि विवाद के चलते उनके या उनके परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
नगर कोतवाली पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप
पीड़ित के अनुसार, उन्होंने घटना के बाद नगर कोतवाली पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने 7 अक्टूबर 2026 को एसडीएम नवाबगंज को प्रार्थना पत्र दिया।
पीड़ित का दावा है कि एसडीएम ने मामले में जांच और कार्रवाई के लिए नगर कोतवाली पुलिस को निर्देशित किया था। इसके बावजूद उनके अनुसार न तो आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और न ही विवाद का समाधान हो सका।

9 अक्टूबर को फिर एसडीएम से लगाई गुहार
गुरप्रीत सिंह ने बताया कि 9 अक्टूबर 2026 को उन्होंने एक बार फिर एसडीएम नवाबगंज को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। उनके मुताबिक, एसडीएम ने दोबारा नगर कोतवाली पुलिस को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।
पीड़ित का आरोप है कि लगातार शिकायतें देने और प्रशासनिक स्तर पर निर्देश जारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से संबंधित लोगों के हौसले बढ़ रहे हैं। उनका दावा है कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान-माल की धमकियां मिल रही हैं।

निर्माण विवाद के साथ सुरक्षा का भी सवाल
यह मामला केवल निर्माण कार्य के विवाद तक सीमित नहीं है। पीड़ित की शिकायत में कथित तौर पर आदेश की अवहेलना, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और पुलिस के सामने हुए घटनाक्रम का उल्लेख है।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामले में संबंधित आदेशों के अनुपालन और पीड़ित की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठेंगे। फिलहाल, आरोपों की सत्यता और संबंधित पक्षों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पीड़ित ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, धमकी देने के आरोपों पर कानूनी कार्रवाई की जाए और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद
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