Barabanki: पिस्टल लेकर मदरसों में भय व दहशत फैलाने और नाबालिग छात्राओं से अभद्रता करने वाले DMO की बढ़ सकती है मुश्किलें — शासन ने मांगा हलफनामा

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बाराबंकी DMO संजय मिश्रा की बढ़ीं मुश्किलें। अनीस मंसूरी ने पिस्टल लहराने और महिलाओं से अभद्रता की शिकायत पर शासन को साक्ष्य और हलफनामा सौंपा।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश।

बाराबंकी के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (DMO) संजय मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर राज्य शासन ने संज्ञान लेते हुए हलफनामा (Affidavit) और साक्ष्य मांगे हैं।

 

अनीस मंसूरी ने शासन को सौंपे अपने लिखित हलफनामे में कहा है कि “संजय मिश्रा पर लगे आरोप मामूली नहीं हैं, बल्कि ये कानून, मर्यादा और मानवाधिकार — तीनों की सीमाओं का उल्लंघन करते हैं।”

 

उन्होंने आरोप लगाया कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मदरसों में खुलेआम पिस्टल लेकर निरीक्षण करने जाते हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों में भय व दहशत का माहौल बनता है। यही नहीं, उन पर महिला शिक्षिकाओं और नाबालिग छात्राओं से अभद्रता करने, और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

DMO संजय मिश्रा
फोटो DMO बाराबंकी संजय मिश्रा

अनीस मंसूरी ने कहा कि यह आचरण न केवल विशाखा बनाम राजस्थान सरकार के फैसले और शस्त्र अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि महिला सम्मान और निजता के अधिकार पर भी सीधा हमला है। उन्होंने कहा, “ऐसे अधिकारी विभाग की साख को कलंकित करते हैं और अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।”

 

मंसूरी ने बताया कि इस मामले में उन्होंने 9 सितंबर 2025 को शासन को शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद 16 अक्टूबर 2025 को उनसे साक्ष्य और शपथपत्र (Affidavit) मांगा गया। उन्होंने शासन को कई दस्तावेज़, तस्वीरें और वीडियो साक्ष्य भी सौंपे हैं, जो कथित अनियमितताओं और अनुचित व्यवहार की पुष्टि करते हैं।

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उन्होंने कहा कि शासन को इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए तथा आरोपी अधिकारी संजय मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। मंसूरी का कहना है कि “जब तक मिश्रा पद पर हैं, तब तक जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हो सकती।”

 

अनीस मंसूरी ने तीखे शब्दों में कहा — “जब एक अधिकारी मदरसों में बंदूक लेकर जाता है और बच्चों व महिला शिक्षिकाओं को डराता है, तो यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि सत्ता के नाम पर आतंक फैलाने की कोशिश है। सरकार को तय करना होगा कि वह सच्चाई के साथ है या ऐसे अफसरों के साथ।”

 

वहीं शासन स्तर पर इस पूरे प्रकरण पर रिपोर्ट तलब की गई है। सूत्रों के अनुसार, अगर आरोप प्रमाणित पाए गए तो अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना है।


रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Barabanki Express

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