Barabanki: विद्यालय मर्जर के विरोध में अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, बच्चों को स्कूल भेजने से किया इंकार

 


बाराबंकी, 21 जुलाई।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा परिषदीय विद्यालयों में छात्र संख्या कम होने पर स्कूलों को आपस में मर्ज (विलय) करने के आदेश के खिलाफ बाराबंकी के मसौली क्षेत्र में सोमवार को ग्रामीणों और अभिभावकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। मामला ग्राम मदारपुर का है, जहां प्राथमिक विद्यालय मदारपुर को पूर्व माध्यमिक विद्यालय मसौली में मर्ज किए जाने पर अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने से मना कर दिया और स्कूल गेट पर तालाबंदी कर दी।
क्या है मामला?
राज्य सरकार के बेसिक शिक्षा विभाग ने 16 जून 2024 को एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत ऐसे प्राथमिक स्कूल, जिनमें 50 से कम छात्र नामांकित हैं, उन्हें पास के उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में विलय करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम शिक्षा संसाधनों के बेहतर उपयोग, गुणवत्ता सुधार और प्रशासनिक खर्चों में कटौती के लिए है।

इसी आदेश के तहत प्राथमिक विद्यालय मदारपुर, जिसमें इस समय 27 छात्र नामांकित हैं, को मसौली के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में मर्ज किया गया। सोमवार को जब स्कूल के शिक्षक बच्चों को नए स्कूल में पढ़ाने के लिए ले जाने लगे, तो अभिभावक भड़क उठे।
स्कूल गेट पर तालाबंदी, विरोध में नारेबाजी
गांव के अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने से मना कर दिया और स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी। इसके बाद गांव के कई लोग — जिनमें ननकू, राम खेलावन, गुड़िया, बेबी, राजकुमार, कांतिदेवी, सुषमा और अन्य शामिल थे — गेट के सामने जुट गए और विलय के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों की मांग — “स्कूल को बंद न किया जाए”
प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का कहना है कि गांव के छोटे-छोटे बच्चे 500 मीटर दूर स्थित विद्यालय तक नहीं जा सकते। उनका साफ कहना है कि सरकार को चाहिए कि स्कूल बंद करने के बजाय शिक्षकों का समायोजन कर दे।
प्राथमिक विद्यालय मदारपुर में वर्तमान में 5 शिक्षक कार्यरत हैं — जिनमें प्रधानाध्यापिका नसीम जहां, सहायक अध्यापक महेंद्र कुमार, और शिक्षामित्र अनीता राव, शैल कुमारी व गायत्री देवी शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इतने स्टाफ के रहते स्कूल को बंद करना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
मसौली शिक्षा क्षेत्र में 11 स्कूलों का विलय
मसौली ब्लॉक में कुल 89 प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें से 11 स्कूलों को कम छात्र संख्या के आधार पर मर्ज किया गया है। इसमें मदारपुर, गिरधारी पुरवा, सिसवारा, भगेलापुरवा, याकूतगंज, सोहराबाद, कडेरा, जमालपुर जैसे विद्यालय शामिल हैं। इन विद्यालयों के सैकड़ों छात्रों की शिक्षा पर असर पड़ रहा है।

ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने की पहल, फिर भी हल नहीं
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि उमाकांत राव ने अभिभावकों की बात को खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) जानेंद्र गुप्ता तक फोन पर पहुंचाया, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
बीईओ का बयान: “सरकारी आदेश का पालन अनिवार्य”
जब इस मुद्दे पर खंड शिक्षा अधिकारी जानेंद्र गुप्ता से बात की गई, तो उन्होंने कहा:
 “यह निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है, और हम केवल निर्देशों का पालन कर रहे हैं। स्कूल बंद करने या संचालन संबंधी जो भी दिशा-निर्देश मिलेंगे, उसी के अनुसार कार्य किया जाएगा।”
निष्कर्ष
एक ओर सरकार “स्कूल चलो अभियान” जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य लेकर चल रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल बंद कर देने से शिक्षा की बुनियाद कमजोर होती दिख रही है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस विरोध को गंभीरता से लेगा या फिर सरकारी आदेश के तहत ही आगे बढ़ेगा।
रिपोर्ट – नूर मोहम्मद

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Barabanki Express
Author: Barabanki Express

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