Barabanki: राजस्व निरीक्षक का गजब कारनामा, 15 हजार की रिश्वत लेने के बाद भी नहीं कराई मेडबंदी, कोर्ट में दाखिल कर दी फर्जी रिपोर्ट

 


बाराबंकी, उत्तर प्रदेश।
जिले की हैदरगढ़ तहसील में राजस्व विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। यहां एक राजस्व निरीक्षक ने 15 हजार रुपये की घूस लेने के बावजूद खेत की मेडबंदी नहीं कराई और बिना स्थल पर कार्रवाई किए ही फर्जी रिपोर्ट बनाकर एसडीएम कोर्ट में दाखिल कर दी। मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित ने वाद पत्रावली का अवलोकन कराया। अब पीड़ित ने एसडीएम हैदरगढ़ को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
क्या है मामला?
प्रकरण है तहसील हैदरगढ़ क्षेत्र के ग्राम हुसैनाबाद का। यहां के निवासी श्रीनाथ पुत्र गुरुदीन ने बताया कि गांव की गाटा संख्या 963, रकबा 0.378 हेक्टेयर जमीन उनके सहित रामलखन, जगन्नाथ, भारत आदि के नाम सहखातेदारों के रूप में दर्ज है। इसी जमीन के कुछ हिस्से पर जगदीश प्रसाद व अन्य पड़ोसी किसानों ने कब्जा कर लिया, जिससे विवाद उत्पन्न हो गया।
विवाद के समाधान के लिए श्रीनाथ ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 24 के अंतर्गत एसडीएम हैदरगढ़ न्यायालय में वाद संख्या T202404120506644 के तहत मेडबंदी व पक्की पैमाइश के लिए आवेदन किया। 30 दिसंबर 2024 को एसडीएम कोर्ट ने आदेश पारित कर मेडबंदी कराने का निर्देश दिया।

रिश्वत ली, लेकिन काम अधूरा छोड़ा
श्रीनाथ का आरोप है कि आदेश के बावजूद राजस्व निरीक्षक उमेश कुमार साहू लंबे समय तक टालमटोल करते रहे। बाद में उन्होंने मेडबंदी कराने के लिए 15 हजार रुपये की मांग की। पीड़ित पक्ष ने 18 जून 2025 को चंदा इकट्ठा कर यह राशि निरीक्षक को दे दी।
19 जून की शाम करीब 5 बजे राजस्व निरीक्षक गांव पहुंचे और लकड़ी के खूंटे गाड़ने की शुरुआत की। लेकिन उसी दौरान एक फोन आने पर उन्होंने कहा कि “अधिकारी का फोन आया है, मुझे तहसील बुलाया गया है। कल आकर काम पूरा करेंगे।” इसके बाद वे मौके से चले गए और दोबारा वापस नहीं आए।
फर्जी आख्या से खुली पोल
जब कई दिन बीत जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो वादकर्ता श्रीनाथ ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से मुकदमे की पत्रावली का निरीक्षण कराया। तब यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि राजस्व निरीक्षक ने 19 जून 2025 को ही कोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल कर दी थी, जिसमें लिखा गया था कि:
“एसडीएम के आदेशानुसार, पुलिस बल व राजस्व टीम की उपस्थिति में वादी, प्रतिवादी व अन्य ग्रामवासियों की मौजूदगी में सफलतापूर्वक मेडबंदी करा दी गई है। वादी द्वारा अपनी मेड बनवा ली गई है तथा अब कोई विवाद शेष नहीं है।”
जबकि स्थल पर कोई वास्तविक मेडबंदी नहीं कराई गई थी, और जमीन पर पूर्व की तरह ही कब्जा बना हुआ है।

पीड़ित ने की कार्रवाई की मांग
श्रीनाथ समेत अन्य सहखातेदारों ने एसडीएम हैदरगढ़ को शिकायती पत्र सौंपकर मांग की है कि दोषी राजस्व निरीक्षक के खिलाफ कठोर विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वास्तविक मेडबंदी नहीं कराई जाती, तब तक विवाद का समाधान संभव नहीं है।
प्रशासन पर उठते सवाल
यह मामला न केवल एक घोर लापरवाही का परिचायक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि घूसखोरी और झूठी रिपोर्टिंग जैसे मामलों से न्यायिक प्रक्रिया को किस हद तक प्रभावित किया जा रहा है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों का प्रशासनिक व्यवस्था से विश्वास उठना तय है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Barabanki Express

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