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बाराबंकी : मौज़ा घघसी मे क़ारी रफ़ीक़ नदवी की सरपरस्ती में नातिया मुशायरे का हुआ आयोजन, शायरों के कलामों पर रात भर झूमते रहे श्रोतागण

 

बेलहरा-बाराबंकी

फतेहपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत मौज़ा घघसी में क़ारी रफ़ीक़ नदवी की सरपरस्ती में एक शानदार नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें मक़ामी व दूर दराज़ से आये प्रसिद्ध शायरों ने अपना-अपना कलाम पढ़कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुशायरे की अध्यक्षता मौलाना हारून क़ासमी व संचालन सूफ़ियान हैदर राँचवी ने किया। कार्यकम से पहले समाजसेवी मो.रहीम राजा ने शायरों व पत्रकारों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।मुशायरे का आगाज़ क़ारी मोहम्मद उस्मान नदवी साहब की क़ुरआन पाक की तिलावत से हुआ उसके बाद शायरों ने अपने कलामो से ऐसा समा बांधा कि समय कम पड़ गया मगर सुनने वाले जमे रहे। शायर हस्सान साहिर ने पढ़ा “ठुकरा दिया हुज़ूर ने ज़र और ज़मीन व ज़न, कुफ़्फ़ार करके रह गए अपने जतन तमाम” शराफ़त बिस्वानवी ने अपना कलाम कुछ इस अंदाज में पेश किया “ये चांद न होता ये सितारे नही होते, जग में जो आमिना के दुलारे नही होते” वही क़ारी परवेज़ यज़दानी ने “पानी की रवानी में कमी आई ना कोई, फ़ारूक़ ने ख़त नील को जिस दिन से लिखा है” पढ़कर लोगो को सुभानअल्लाह कहने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद उनके द्वारा पढ़ी गयी नात “सरकार की आमद मरहबा” पर सामने बैठे लोगों ने भी उनका खूब साथ दिया।फ़हीम पीहानवी ने पढ़ा “अगर आक़ा छुपा ले रोज़ महशर अपनी कमली में, तो हम जैसे गुनाहगारों का बेड़ा पार हो जाय”। फ़ैसल लखनवी ने पढ़ा “फ़ैसल तसव्वरात की मेराज देखिए, काबे में है सहेर तो मदीने में शाम है”। गुफरान कामिल ने पढ़ा “एक आयत छोड़िये नुक़्ता बदल सकता नही, हक़ ताला की निगरानी में ये क़ुरआन है”। अमीरुल हसन ने पढ़ा “अक़्सा हम से चीख़ के कहती है आज भी, दुश्मन हमारी गोद को रंगीन कर गया”। तल्हा ख़ालिद झारखंडी ने पढ़ा “महफ़िल में करेंगे सरे बाज़ार करेंगे, सरकार के एखलाक़ का परचार करेंगे”। असद आज़मी ने पढ़ा “उसियां की तैश में हूँ रहमत का शजर दे दो, उड़ के मैं चला जाऊं मौला मुझे पर दे दो” इसके अलावा मुफ़्ती तारिक़ जमील कन्नौजी, ज़ाहिद धड़कन, जहाना कन्नौजी ने भी अपने नातिया कलाम पेश किए। इस मौके पर मौलाना रेहान नदवी, अज़ीज़ अंसारी, मौलाना बिलाल नदवी, पप्पू वर्मा के अलावा मुशायरा कमेटी के सदस्य सहित काफ़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। अंत मे मुशायरा कन्वेनर अबरार अंसारी ने सभी शायरों, अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।

रिपोर्ट – तौसीफ़ ख़ान

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