बाराबंकी : ‘अश्लील वीडियो’ ने सांसद उपेन्द्र रावत के अरमानों पर फेरा पानी! BJP आलाकमान की फटकार के बाद करना पड़ा चुनाव न लड़ने का ऐलान ?

 

बाराबंकी।
रविवार को सोशल मीडिया पर आधा दर्जन से ज्यादा ‘अश्लील वीडियो’ वायरल होने के बाद आज सोमवार को सांसद उपेन्द्र सिंह रावत का बयान सामने आया है। एक्स पर किये पोस्ट में उन्होंने वायरल वीडियो को एडिटेड और Deep Fake AI तकनीक के ज़रिए बनाए जाने की बात कहते हुए जाँच की मांग की है। खास बात यह है कि उन्होंने निर्दोष साबित होने तक सार्वजनिक जीवन मे कोई भी चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी है।

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आपको बताते चले कि कल रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए भाजपा सांसद उपेन्द्र सिंह रावत के आधा दर्जन से ज्यादा अश्लील वीडियो ने बाराबंकी से लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भूचाल मचा दिया। चुनावी मौसम में वायरल वीडियो को हथियार बना कर विरोधी दलों ने भाजपा पर निशाना साधना शुरू कर दिया। चौतरफा किरकिरी के चलते शाम होते होते भाजपा आलाकमान को सांसद उपेन्द्र रावत को तलब करना पड़ गया।
भाजपा के सूत्रों की माने तो भाजपा आलाकमान से मिली कड़ी फटकार के बाद सांसद उपेन्द्र रावत को बैकफुट पर आना पड़ा है। रविवार तक वो जहां वायरल वीडियो को एडिटेड और विरोधियों की साजिश बता रहे थे और वीडियो वायरल करने वालो पर FIR दर्ज करवा कर ही ख़ुद को मासूम साबित करने में लगे थे। वही बीजेपी आलाकमान से मिली कड़ी फटकार के बाद उनके सुर ही बदल गए। सोमवार को दोपहर होते होते उन्हे सोशल साइट एक्स पर पोस्ट करके निर्दोष न साबित होने तक सार्वजनिक जीवन में कोई भी चुनाव न लड़ने की घोषणा करनी पड़ी।

भाजपा सांसद उपेन्द्र सिंह रावत भले ही वायरल वीडियो को एडिटेड और AI तकनीक से निर्मित बता कर जांच की मांग कर रहे है लेकिन उनकी यह दलीलें वायरल वीडियो देखने वालो के गले नही उतर रही है। उपेन्द्र रावत के पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स तरह तरह के कमेंट्स कर रहे है। भाजपा से जुड़े यूजर्स जहाँ उन्हें निर्दोष बताते हुए उनके साथ खड़े होने की बात कर रहे है वही ज्यादातर लोग वायरल वीडियो को असली बताते हुए खूब चुटकी ले रहे हैं। कुछ यूजर्स ने तो यह तक कह डाला कि शुरू शुरू में ‘कुल्हड़ पिज़्ज़ा’ वाले कपल ने भी ऐसा ही कहा था लेकिन बाद में उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी।
क्या है डीप फेक AI तकनीक
डीप फेक ‘डीप लर्निंग’ और ‘फेक’ का सम्मिश्रण है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रयोग कर किसी मीडिया फाइल की नकली कॉपी तैयार की जाती है, जो वास्तविक फाइल की तरह ही दिखती है और ठीक उसी तरह बातचीत करती है या उसी तरह की आवाज निकालती है, जैसी संबंधित व्यक्ति की असल में होती है। दूसरे शब्दों में कहें, तो डीप फेक अपने सबसे सामान्य रूप में ऐसे वीडियो होते हैं जहां एक व्यक्ति के चेहरे को कंप्यूटर जनित चेहरे से बदल दिया गया होता है। ये वीडियो डिजिटल सॉफ्टवेयर, मशीन लर्निंग और फेस स्वैपिंग का उपयोग करके बनाये गये कृत्रिम वीडियो होते हैं।
कैसे करे असली और नकली का फर्क
सायबर एक्सपर्ट बताते हैं कि डीप फेक AI तकनीक से बनायी वीडियोज को स्पॉट करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन कुछ ऐसे साइन हैं जिनकी मदद से आप उन्हें पहचान सकते हैं। वह बताते हैं, “अननेचुरल ब्लिंकिंग, मिसमैच लिप-सिंकिंग, इनकंसिस्टेंट लाइटिंग और खराब क्वालिटी वाले किनारे ऐसे साइन हैं जिन पर आपको गौर करना चाहिए।”

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रिपोर्ट – मन्सूफ अहमद

 

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Author: Barabanki Express

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