बाराबंकी।
बाराबंकी की सदर तहसील में तैनात राजस्वकर्मियों और भूमाफियो के गठजोड़ के चलते जहाँ आम लोगो के लिए अपनी ही ज़मीन जायदाद बचाना मुश्किल हो गया है, वही सीएम योगी से लेकर हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए सरकारी तालाबों व ज़मीनों पर भी धड़ल्ले से अवैध कब्ज़े किए व कराए जा रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि अवैध कब्ज़ों की शिकायतो की ज़िम्मेदार अधिकारियों द्वारा अनदेखी की जा रही है वही मातहतों द्वारा शिकायतकर्ताओं को फर्ज़ी केस में फसाने की धमकी देकर उनका मुह बन्द कराया जा रहा है। जो धमकी के बाद भी इनके खिलाफ आवाज़ बुलंद कर रहा उसके ख़िलाफ़ फर्ज़ी मुकदमा दर्ज कराने से भी परहेज़ नही किया जा रहा है।
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ताज़ा मामला बाराबंकी की नवाबगंज तहसील क्षेत्र के विकास खण्ड बंकी के पाटमऊ गांव का है। जहां के निवासी ब्रजेश वर्मा पुत्र स्व0 चंद्रपाल वर्मा ने बताया कि उनकी ग्रामपंचायत पाटमऊ की गाटा सं0 126 रकबा 0.500 हे0, 1266 रकबा 1.245 हे0, 1289क रकबा 0.512 हे0, 1289ख रकबा 0.511 हे0, 1130ख रकबा 2.183 हे0, 509 रकबा 0.076 हे0, गाटा स0 510 रकबा 0.320 हेक्टेयर राजस्व अभिलेखों में सुरक्षित तालाब के रूप में दर्ज है। आरोप है कि ग्रामप्रधान राजकिशोर जो काफी दबंग व भूमाफिया किस्म के आदमी है, ने हल्का लेखपाल दीपक पाल की साठगांठ से गांव के सुरक्षित तालाबों की पचासों बीघा ज़मीन पर अपने करीबी व परिवार के लोगो का अवैध कब्ज़ा करवा दिया है। ब्रजेश वर्मा ने बताया कि करीब एक साल से वह सरकारी तालाबो की ज़मीनो से अवैध कब्ज़ा हटवाने के लिए आईजीआरएस पर दर्जनों शिकायत कर चुके हैं लेक़िन साठगांठ के चलते हरबार गलत आख्या लगाकर उनकी शिकायतो का निस्तारण कर दिया जाता है। मामले को लेकर उन्होंने कई बार सम्पूर्ण समाधान दिवस में भी शिकायत की लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात ही निकला।




जांच के नाम पर जमकर हुई मनमानी
पीड़ित ने बताया कि दोषियों को बचाने के लिए उसकी शिकायतो पर मनमानी रिपोर्ट लगाकर निस्तारण कर दिया गया। जांच रिपोर्ट में उन तालाबो का ज़िक्र तक नही किया गया जिसपर ग्रामप्रधान के करीबी और परिवार के लोग कब्ज़ा कर खेती कर रहे है। इसके अलावा जिस तालाब पर अवैध कब्जे की बात लिखी भी गयी तो उसमें भी यह नही दर्शाया गया कि मौके पर की गई जांच में तालाब पर किसका अवैध कब्ज़ा पाया गया है। दोषियों को बचाने के लिए राजस्वकर्मियों द्वारा जमकर खेल किया जा रहा है।

लेखपाल और प्रधान ने दी शांत बैठने की धमकी
पीड़ित ब्रजेश वर्मा ने बताया कि अवैध कब्ज़ों को लेकर करी गयी दर्जनों शिकायतो के बावजूद ना तो सरकारी तालाबों से अवैध कब्ज़े हटवाए गए और न दोषियों पर ही कोई कार्रवाई करी गयी। उल्टा लेखपाल और ग्रामप्रधान द्वारा उसे ही शांत बैठने के लिए धमकाया जाने लगा। शांत ना बैठने पर जान से मरवा देने से लेकर सरकारी जमीन पर अवैध कब्ज़े के फर्ज़ी मामले में फंसाकर उसकी ही पुश्तैनी ज़मीन पर लगी फसल जुतवा देने और फर्ज़ी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकियां मिलना शुरू हो गयी।
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ब्रजेश वर्मा ने बताया कि आईजीआरएस पर कोई सुनवाई ना होती देख उसने दो बार सम्पूर्ण समाधान दिवस में एसडीएम व डीएम को प्रार्थना पत्र दिया फिर भी सुनवाई नही हुई तो दिनांक 12 अगस्त 2024 को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास जाकर सीएम योगी के दरबार मे सरकारी तालाबो से अवैध कब्जे हटवाने की गुहार लगाई। पीड़ित का सीएम योगी से शिकायत करना अधिकारियो को इतना नागवार गुजरा कि दो दिन बाद 14 अगस्त 2024 को लेखपाल दीपक पाल के साथ अवैध कब्ज़ा हटवाने उसके गांव पहुंची तहसील नवाबगंज की महिला अधिकारी ने अवैध कब्ज़ा हटवाने के दौरान सुरक्षित तालाब गाटा संख्या 1266 रकबा 1.245 हेक्टेयर से सटी शिकायतकर्ता की ज़मीन गाटा सं 1268 व उसके परिवार के ओमप्रकाश की ज़मीन गाटा सं0 1267 पर लगी धान की फसल के कुछ हिस्से को भी अवैध कब्ज़ा बताकर जुतवा दिया। इस दौरान पीड़ित ब्रजेश ने फेसबुक लाइव करते हुए महिला अधिकारी से कहा कि मैडम जो शिकायत कर रहा है उसी का खेत जुतवा दिया जा रहा है वो भी उसका रकबा नापे बगैर, तो मैडम का जवाब था कि “आप योगी जी के यहां गए, योगी जी क्या आएं यहाँ आपका खेत नपवाने ?आपको जहां जाना चाहिए था आप वहां तो गए नही” जिस पर जब पीड़ित ने कहा कि मैडम जनवरी से कम्प्लेंट कर रहे हैं तो महिला अधिकारी ने बात बदलते हुए सवाल किया कि आईजीआरएस पर आपने कम्प्लेंट किया ? पीड़ित ने बताया कि कम से कम 25 कम्प्लेंट कर चुका है। पीड़ित ने अपनी खतौनी, नक्शा, IGRS कम्प्लेंट की कॉपी सब दिखाया लेकिन उसकी एक ना सुनी गयी।



महिला अधिकारी का बयान सुनने के लिए देखे वीडियो
फर्ज़ी मुकदमा दर्ज कराकर गिरफ्तारी का बनाया जा रहा दबाव
पीड़ित ने बताया कि 14 अगस्त को ही सरकारी तालाब गाटा सं 1266 पर अवैध कब्ज़ा करने वालो पर मुकदमा दर्ज कराते समय लेखपाल ने प्रधान के चचेरे भाइयो ब्रजराज सिंह व रामसुमिरन को तो बचा लिया, लेकिन पूर्व में दी गयी धमकी को अमलीजामा पहनाते हुए उसे और उसके परिवार के ही ओमप्रकाश को आरोपी बनाकर ज़ैदपुर थाने में केस दर्ज करवा दिया गया। पीड़ित ने बताया कि अब आरोपियों के दबाव में पुलिस उसे फोन कर करके परेशान कर रही है और घर पर दबिश डाली जा रही है। जबकि इसी मुकदमे के अन्य आरोपी आराम से गांव में घूम टहल रहे हैं। कुल मिलाकर राजस्वकर्मियों, अधिकारियों और भूमाफियाओं के मकड़जाल का शिकार होने के बाद अब ब्रजेश वर्मा उस घड़ी को कोसने पर मजबूर हैं जब उन्होंने गांव के सरकारी तालाबों पर अवैध कब्ज़ों को लेकर सीएम योगी से शिकायत की थी।

बीजेपी को भारी पड़ सकती है अधिकारियों की मनमानी
गौरतलब की प्रदेश में अधिकारियों की तानाशाही और मनमानी से परेशान जनता ने विगत लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ मतदान कर अपने गुस्से का इज़हार किया था। सीएम से लेकर पीएम मोदी के जी जान लगा देने के बावजूद प्रदेश में हुई भाजपा की दुर्गति के कारण तलाशने को लेकर हुई मैराथन बैठकों में भी यह बात सामने आई थी। अब यदि समय रहते अधिकारियों की निरंकुशता पर नकेल ना कसी गयी तो 2027 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा इससे इनकार नही किया जा सकता है।
रिपोर्ट – कामरान अल्वी
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Author: Barabanki Express
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